पटना। बिहार विधान परिषद चुनाव के मतदान से ठीक पहले राजधानी पटना में बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार सिंह के आवास पर गुरुवार देर रात पुलिस की टीम पहुंच गई। बताया जा रहा है कि पुलिस सात गाड़ियों के काफिले के साथ उनके घर पहुंची थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि उम्मीदवार के आवास पर कुछ ऐसे लोग ठहरे हुए हैं, जो चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। इस दौरान पुलिस और राजद प्रत्याशी के समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। घटना की जानकारी सामने आते ही बिहार की राजनीति गरमा गई। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।

आधी रात को राजद प्रत्याशी के घर पहुंची पुलिस

जानकारी के अनुसार, गुरुवार, 22 अक्टूबर की देर रात पुलिस की टीम पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार सिंह के आवास पर पहुंची। पुलिस के अचानक पहुंचने से वहां मौजूद लोगों के बीच हलचल मच गई।

बताया जा रहा है कि पुलिस अधिकारियों को सूचना मिली थी कि प्रत्याशी के घर पर कुछ बाहरी लोग ठहरे हुए हैं, जिनकी मौजूदगी से मतदान प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।

इसी सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और वहां मौजूद लोगों के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की।

हालांकि, राजद प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई के समय और तरीके पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि मतदान से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है।

पुलिस और समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक

पुलिस टीम के आवास पर पहुंचने के बाद वहां मौजूद समर्थकों के साथ बहस शुरू हो गई। राजद प्रत्याशी के समर्थकों ने पुलिस से कार्रवाई का कारण पूछा।

इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक होने की बात सामने आई है। घटना से जुड़ा वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस की मौजूदगी और वहां के तनावपूर्ण माहौल को देखा जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस की टीम बाद में वहां से लौट गई। इस दौरान किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस की कार्रवाई के पीछे प्राप्त सूचना की वास्तविकता और आवास पर मौजूद लोगों की भूमिका को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

तेजस्वी यादव ने सम्राट सरकार पर साधा निशाना

घटना की जानकारी मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस मामले को उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार चुनाव के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों को डराने और दबाव बनाने के लिए पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने कहा कि सत्ता की ताकत का इस्तेमाल करके विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। राजद के नेता और कार्यकर्ता ऐसी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।

तेजस्वी ने चुनाव से ठीक पहले पुलिस के राजद उम्मीदवार के आवास पर पहुंचने के समय पर भी सवाल उठाए।

उनका आरोप है कि यह कार्रवाई निष्पक्ष चुनावी वातावरण को प्रभावित करने का प्रयास है। हालांकि, सरकार या पुलिस की ओर से राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य की पुष्टि नहीं हुई है।

मतदान से पहले राजनीतिक माहौल गरमाया

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मतदान हो रहा है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

मतदान से कुछ घंटे पहले राजद प्रत्याशी के आवास पर पुलिस पहुंचने की घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

राजद इसे प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय राजनीतिक दबाव की रणनीति बता रहा है। दूसरी ओर, चुनाव के दौरान बाहरी व्यक्तियों की गतिविधियों और संभावित गड़बड़ियों पर नजर रखना प्रशासन की जिम्मेदारी भी है।

ऐसे में इस मामले में पुलिस कार्रवाई के आधार और उसकी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पटना शिक्षक सीट पर कई दिग्गज मैदान में

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में इस बार दिलचस्प चुनावी मुकाबला देखने को मिल रहा है।

भारतीय जनता पार्टी ने मौजूदा विधान पार्षद नवल किशोर यादव को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार सिंह पर भरोसा जताया है।

कांग्रेस की ओर से संजय यादव चुनाव मैदान में हैं, जबकि जन सुराज पार्टी ने दिव्या ज्योति को प्रत्याशी बनाया है।

राजद और कांग्रेस की ओर से अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में उतारे जाने के कारण इस सीट पर विपक्षी दलों के बीच भी मुकाबला है।

जदयू छोड़कर राजद में आए थे डॉ. संजीव कुमार

डॉ. संजीव कुमार सिंह पहले जनता दल यूनाइटेड से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले जदयू छोड़कर राजद का दामन थामा था।

इसके बाद उन्होंने परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके।

अब पार्टी ने उन्हें पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बनाया है।

राजद ने सितंबर में अपने उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए डॉ. संजीव कुमार सिंह को इस महत्वपूर्ण सीट से चुनाव मैदान में उतारा था।

आठ सीटों पर 150 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर

बिहार विधान परिषद चुनाव में कुल 150 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनकी किस्मत का फैसला पांच लाख 32 हजार से अधिक पंजीकृत मतदाता करेंगे।

मतदान शुक्रवार सुबह आठ बजे शुरू हुआ है और शाम चार बजे तक निर्धारित है।

आठ निर्वाचन क्षेत्रों के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मतदान केंद्रों पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है।

चुनाव में चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर रहे हैं।

मतदान के बाद 27 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी और इसके बाद चुनाव परिणाम घोषित होंगे।

निष्पक्ष चुनाव को लेकर उठे सवाल

राजद प्रत्याशी के घर पुलिस पहुंचने की घटना ने चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

एक तरफ विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल उसके उम्मीदवारों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। दूसरी तरफ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है।

ऐसी स्थिति में जरूरी है कि किसी भी कार्रवाई का आधार स्पष्ट हो और सभी उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार किया जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान से ठीक पहले इस प्रकार की घटनाएं चुनावी माहौल पर असर डाल सकती हैं।

27 अक्टूबर को आएगा चुनावी फैसला

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा, राजद, कांग्रेस और जन सुराज के प्रत्याशी अपनी राजनीतिक ताकत आजमा रहे हैं।

डॉ. संजीव कुमार के आवास पर देर रात पुलिस पहुंचने की घटना के बाद इस सीट पर राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है।

तेजस्वी यादव के आरोपों के बाद अब पुलिस की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण और आगे की कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।

फिलहाल राजद इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है। वहीं चुनाव प्रशासन के सामने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान संपन्न कराने की चुनौती है।

अब 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना से स्पष्ट होगा कि पटना शिक्षक सीट पर मतदाताओं ने किस उम्मीदवार पर भरोसा जताया है।

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