पटना/नई दिल्ली। बिहार में सड़क और परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राज्य की चार प्रमुख सड़क एवं पुल परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने का अनुरोध किया। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब 49 हजार 751 करोड़ रुपये है। इनमें पटना-पूर्णिया फोरलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, पटना में छह लेन एलिवेटेड सड़क, गंडक नदी पर नया पुल और वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के आवास पर उच्चस्तरीय बैठक की। इस दौरान बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे और पुलों के निर्माण से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं को केंद्र सरकार की सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) से पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। हालांकि, इन परियोजनाओं को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि इन परियोजनाओं को जल्द मंजूरी दिलाई जाए, ताकि निर्माण कार्यों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
राज्य सरकार के अनुसार, इन चार परियोजनाओं की कुल लंबाई लगभग 330 किलोमीटर है। इनके निर्माण से बिहार के विभिन्न जिलों के बीच संपर्क बेहतर होने के साथ ही पड़ोसी राज्यों तक सड़क परिवहन सुविधाओं का विस्तार होगा।
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण परियोजना पटना-पूर्णिया चार लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे रही। इस परियोजना की अनुमानित लागत 31,987.11 करोड़ रुपये बताई गई है। इसे एनएच-09 के अंतर्गत हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर विकसित करने की योजना है।
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे को बिहार के सड़क नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके निर्माण से राजधानी पटना और पूर्वोत्तर बिहार के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
वर्तमान में पटना से पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों तक यात्रा करने वाले लोगों को कई स्थानों पर यातायात के दबाव का सामना करना पड़ता है। प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के बनने से यात्रा के समय में कमी आने की उम्मीद है।
इस परियोजना का लाभ पूर्णिया के अलावा आसपास के जिलों के यात्रियों, व्यापारियों और माल परिवहन से जुड़े लोगों को भी मिल सकता है। कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी बेहतर सड़क संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसके अलावा पटना शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए सरिस्ताबाद-दीदारगंज और अनीसाबाद-दीदारगंज खंड में छह लेन एलिवेटेड सड़क एवं सर्विस रोड बनाने की योजना है।
इस परियोजना पर लगभग 8,455.86 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका निर्माण भी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर प्रस्तावित है।
पटना में वाहनों की बढ़ती संख्या और प्रमुख मार्गों पर यातायात के दबाव को देखते हुए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एलिवेटेड सड़क बनने से लंबी दूरी के वाहनों और स्थानीय यातायात को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
सर्विस रोड के निर्माण से आसपास के आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण शुरू होने की तारीख और कार्य पूरा होने की समयसीमा अंतिम स्वीकृति तथा आगे की प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।
बैठक में गंडक नदी पर प्रस्तावित दो लेन पुल और उसके पहुंच मार्ग के निर्माण पर भी चर्चा हुई। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,976.77 करोड़ रुपये है।
एनएच-727एए से संबंधित यह परियोजना बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में मनुआपुल (बेतिया) को उत्तर प्रदेश के तिवारीपट्टी (सेवरही) क्षेत्र से जोड़ने के लिए प्रस्तावित है।
पुल बनने से बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है। इसके अलावा स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों की ढुलाई और यात्रियों के लिए वैकल्पिक सड़क संपर्क उपलब्ध हो सकेगा।
चौथी प्रमुख परियोजना वाराणसी-रांची-कोलकाता छह लेन ग्रीनफील्ड हाईवे से संबंधित है। इसके अंतर्गत कोणकी गांव से लेरुआ गांव तक प्रस्तावित सड़क निर्माण पर लगभग 7,331.40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इस हाईवे के निर्माण से बिहार का संपर्क उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के साथ और मजबूत हो सकता है। लंबी दूरी के मालवाहक वाहनों और औद्योगिक गतिविधियों के लिहाज से भी यह मार्ग महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के बिहार से गुजरने वाले हिस्से को जल्द राष्ट्रीय एक्सप्रेस-वे के रूप में अधिसूचित करने का भी अनुरोध किया।
इस परियोजना को लेकर राज्य सरकार का मानना है कि इससे उत्तर बिहार का पूर्वोत्तर भारत और उत्तर प्रदेश के साथ संपर्क मजबूत होगा। विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों में आवागमन की सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि राज्य सरकार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सहयोग प्रदान कर रही है।
भूमि अधिग्रहण और निर्माण से पहले की आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों के स्तर पर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद परियोजनाओं को लागू करने में अनावश्यक देरी न हो।
बिहार में सड़क संपर्क बेहतर होने से औद्योगिक निवेश, पर्यटन, व्यापार और कृषि क्षेत्र को फायदा मिलने की संभावना है। राज्य के कई जिलों में माल परिवहन अभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्भर है। नए एक्सप्रेस-वे और पुल बनने से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बिहार में सड़क एवं आधारभूत संरचना के विकास के लिए केंद्र सरकार के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।
फिलहाल इन चार प्रमुख परियोजनाओं को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। मुख्यमंत्री की केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के बाद इनकी स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण संबंधी अगली प्रक्रियाओं और समयसीमा की स्थिति स्पष्ट होगी। यदि परियोजनाओं को स्वीकृति मिलती है और निर्धारित योजना के अनुसार निर्माण पूरा होता है, तो बिहार के सड़क नेटवर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।