पत्नी कल्पना संग दिल्ली रवाना हुए CM हेमंत सोरेन, महारैली में होंगे शामिल
रांची। देश की राजधानी दिल्ली में एक नवंबर 2026 को होने वाली 'वोट बचाओ-देश बचाओ' महारैली को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस रैली में शामिल होने के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुक्रवार, 30 अक्टूबर को अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली रवाना हो गए। दोनों रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से विशेष विमान के जरिए दिल्ली के लिए निकले। मुख्यमंत्री के साथ झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार भी दिल्ली गए हैं। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली इस महारैली में INDIA गठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल होंगे। रैली का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाना है। इस कार्यक्रम को लेकर झारखंड समेत विभिन्न राज्यों से राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता दिल्ली पहुंच रहे हैं।
पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली रवाना हुए मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुक्रवार दोपहर रांची से दिल्ली के लिए रवाना हुए। उनके साथ गांडेय विधानसभा क्षेत्र की विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद थीं।मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, हेमंत सोरेन एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी गठबंधन की महारैली में हिस्सा लेंगे।इस दौरान मुख्यमंत्री की INDIA गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी प्रस्तावित है।दिल्ली प्रवास के दौरान शुक्रवार और शनिवार को विपक्षी नेताओं के साथ राजनीतिक तथा संगठनात्मक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।हालांकि, इन बैठकों में किन विषयों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।हेमंत सोरेन की इस यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन की गतिविधियों में झारखंड मुक्ति मोर्चा की भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी महारैली
INDIA गठबंधन की 'वोट बचाओ-देश बचाओ' महारैली रविवार, एक नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित की जाएगी।इस कार्यक्रम में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।रैली के माध्यम से विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित अपनी चिंताओं को सार्वजनिक मंच पर उठाएंगे।कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताई है।विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताओं की संभावना से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।हालांकि, ये विपक्षी दलों की ओर से लगाए गए आरोप और व्यक्त की गई आशंकाएं हैं। किसी विशेष अनियमितता की पुष्टि संबंधित साक्ष्यों और सक्षम संस्थाओं की जांच पर निर्भर करेगी।
झारखंड से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता दिल्ली रवाना
महारैली में झारखंड की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस और गठबंधन के अन्य घटक दलों ने व्यापक तैयारियां की हैं।गुरुवार, 29 अक्टूबर को झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने रांची से 13 बसों को हरी झंडी दिखाकर दिल्ली के लिए रवाना किया।इन बसों में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे।बताया गया है कि इस जत्थे में टाना भगत समुदाय के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने सभी जिला इकाइयों, मंत्रियों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों से महारैली में भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा है।राज्य से कई कार्यकर्ता बस, ट्रेन और हवाई मार्ग से दिल्ली पहुंच रहे हैं।
SIR को लेकर विपक्ष ने तेज किया विरोध
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा देश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अद्यतन करना है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें तथा नियमानुसार आवश्यक सुधार किए जा सकें।हालांकि, विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया के कुछ पहलुओं को लेकर सवाल उठाए हैं।कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से सूची से न हटे।इसी मुद्दे पर INDIA गठबंधन की ओर से दिल्ली में व्यापक राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे चुनावी पारदर्शिता और मताधिकार से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे।
गठबंधन के नेताओं से मुलाकात करेंगे हेमंत सोरेन
दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं से मुलाकात की संभावना है।इन मुलाकातों के दौरान राजनीतिक घटनाक्रम, विपक्षी दलों के बीच समन्वय और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा हो सकती है।झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों की सरकार है।ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन की गतिविधियों में झारखंड के मुख्यमंत्री की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।हालांकि, किसी विशेष बैठक के निर्णय या गठबंधन की नई रणनीति को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र भी प्रस्तावित
दिल्ली की महारैली के अलावा झारखंड में भी मतदाता सूची और अन्य नीतिगत मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।राज्य में 25 और 26 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की जानकारी सामने आई है।इस विशेष सत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और खान एवं खनिज विकास तथा विनियमन से जुड़े संशोधन कानून जैसे विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन मुद्दों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता जता चुके हैं।दिल्ली की रैली और झारखंड विधानसभा का प्रस्तावित विशेष सत्र अलग-अलग कार्यक्रम हैं, लेकिन दोनों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ा विषय महत्वपूर्ण रहेगा।
छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों से भी नेता पहुंच रहे दिल्ली
महारैली में शामिल होने के लिए केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से भी विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता दिल्ली रवाना हो रहे हैं।छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम, नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत और अन्य वरिष्ठ नेताओं के दिल्ली जाने की जानकारी सामने आई है।वहीं, उत्तराखंड कांग्रेस ने भी महारैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को शामिल कराने की तैयारी की है।कांग्रेस और सहयोगी दलों की कोशिश इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की है।हालांकि, रैली में वास्तविक उपस्थिति और भाग लेने वाले नेताओं की अंतिम सूची कार्यक्रम के आयोजन के बाद ही स्पष्ट होगी।
विपक्षी एकजुटता पर रहेंगी राजनीतिक नजरें
एक नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली महारैली को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन की भागीदारी से झारखंड मुक्ति मोर्चा की उपस्थिति भी इस कार्यक्रम में दर्ज होगी।रैली के दौरान विपक्षी नेता मतदाता सूची, चुनावी पारदर्शिता और नागरिकों के मतदान अधिकारों से जुड़े अपने विचार रख सकते हैं।कार्यक्रम में कांग्रेस और विभिन्न सहयोगी दलों के नेता किन मुद्दों को प्रमुखता देते हैं, इस पर राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर रहेगी।