पटना : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को फुलवारीशरीफ हाई स्कूल परिसर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में दीप प्रज्वलित कर राज्यव्यापी ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र में मौजूद बच्चों, सेविका और अन्य कर्मियों से बातचीत की तथा केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं और चल रही गतिविधियों के बारे में जानकारी ली।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने केंद्र का निरीक्षण किया और बच्चों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक तथा पोषण संबंधी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने सेविका से पूछा कि केंद्र में प्रतिदिन कितने बच्चे आते हैं, उन्हें किस तरह की गतिविधियों से जोड़ा जाता है और उनके लिए क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ काफी समय बिताया और उनसे उनकी पढ़ाई, खेल तथा अन्य गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। बच्चों ने भी उत्साह के साथ मुख्यमंत्री से बातचीत की। कुछ बच्चों ने कविताएं सुनाईं, जबकि कई ने अपना परिचय दिया। मुख्यमंत्री ने बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया।
बच्चों के बीच पहुंचकर मुख्यमंत्री ने उनसे सरल सवाल भी पूछे और उनकी पढ़ाई के प्रति रुचि जानने की कोशिश की। छोटे बच्चों ने अपने अंदाज में जवाब दिए, जिससे कार्यक्रम का माहौल काफी सहज और उत्साहपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री ने बच्चों से नियमित रूप से पढ़ाई करने, खेल-कूद में हिस्सा लेने और नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों के बीच मिठाइयां भी बांटीं। मिठाई मिलने के बाद बच्चों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों का समग्र विकास केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पोषण, स्वास्थ्य और रचनात्मक गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को समुदाय और परिवारों से अधिक प्रभावी तरीके से जोड़ना है। इसके माध्यम से बच्चों, अभिभावकों, आंगनवाड़ी सेविकाओं और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी सेविका से केंद्र की रोजमर्रा की गतिविधियों की जानकारी ली। इसमें बच्चों को दी जाने वाली प्रारंभिक शिक्षा, पोषण आहार, स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां शामिल रहीं। उन्होंने यह भी पूछा कि बच्चों की उपस्थिति कैसी रहती है और अभिभावकों को केंद्र की गतिविधियों से किस तरह जोड़ा जाता है।
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों की शुरुआती शिक्षा और पोषण की मजबूत नींव यहीं से तैयार होती है। कम उम्र में बच्चों को सही पोषण, स्वच्छ वातावरण और सीखने का अवसर मिलना उनके भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है।
आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं और माताओं को भी कई प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में इन केंद्रों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाना और स्थानीय स्तर पर इनकी सक्रियता बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
फुलवारीशरीफ में आयोजित इस कार्यक्रम को राज्यव्यापी पहल की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम के तहत अलग-अलग जिलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में भी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसका मकसद बच्चों और अभिभावकों को केंद्र की सेवाओं के प्रति अधिक जागरूक करना है।
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण केंद्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन्हें बच्चों की शुरुआती शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने बच्चों की प्रस्तुतियों को ध्यान से सुना और उनकी प्रतिभा की सराहना की। कविताएं सुनाने वाले बच्चों को उन्होंने प्रोत्साहित किया और सभी बच्चों से नियमित रूप से आंगनवाड़ी आने के लिए कहा। उन्होंने सेविका से भी बच्चों को पढ़ाई और गतिविधियों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास करने की बात कही।
केंद्र में उपलब्ध व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री ने बच्चों के बैठने, पढ़ने और खेलने की जगह के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि केंद्रों में बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो।
इस तरह ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों के साथ सीधे संवाद और आंगनवाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ हुई। राज्य सरकार की यह पहल बच्चों के शुरुआती विकास, पोषण और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
फुलवारीशरीफ से शुरू हुए इस कार्यक्रम के जरिए सरकार ने आंगनवाड़ी सेवाओं को समुदाय से जोड़ने और बच्चों के विकास में परिवारों की भागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया है। आने वाले दिनों में इस पहल को राज्यभर के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों तक ले जाने की तैयारी है।