लखीसराय। नीट पुनर्परीक्षा 2026 के दौरान बिहार के लखीसराय स्थित परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन में धांधली के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने मुख्य अभियुक्त प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने परीक्षा केंद्र के बायोमेट्रिक कर्मियों की मिलीभगत से मूल परीक्षार्थी के स्थान पर एक स्कॉलर को परीक्षा में प्रवेश दिलाया था। गिरफ्तारी के बाद ईओयू ने प्रमोद कुमार से पूछताछ की। इसके बाद शनिवार को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

यह मामला नीट पुनर्परीक्षा के दौरान परीक्षा की पहचान सत्यापन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। परीक्षा में वास्तविक अभ्यर्थी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में मूल परीक्षार्थी के स्थान पर किसी दूसरे व्यक्ति को प्रवेश दिलाने का आरोप परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला है।

बायोमेट्रिक सत्यापन में गड़बड़ी का आरोप

मामले के अनुसार, नीट पुनर्परीक्षा 2026 के दौरान लखीसराय के एक परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में धांधली की गई थी। आरोप है कि प्रमोद कुमार ने केंद्र पर तैनात बायोमेट्रिक कर्मियों की मिलीभगत से मूल परीक्षार्थी की जगह स्कॉलर को परीक्षा में प्रवेश दिलाया।

परीक्षाओं में बायोमेट्रिक सत्यापन का इस्तेमाल अभ्यर्थी की पहचान की पुष्टि करने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि परीक्षा में वही व्यक्ति शामिल हो, जिसके नाम पर प्रवेश की अनुमति दी गई है। ऐसे में सत्यापन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी सामने आने से मामले की गंभीरता बढ़ गई।

ईओयू ने इस प्रकरण में प्रमोद कुमार को मुख्य अभियुक्त के रूप में गिरफ्तार किया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कथित तौर पर परीक्षा देने पहुंचे स्कॉलर की पहचान क्या है और उसने किस अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा में प्रवेश किया था।

बायोमेट्रिक कर्मियों की मिलीभगत की भी जांच

इस मामले में बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। आरोप है कि उनकी मिलीभगत से ही मूल परीक्षार्थी के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को परीक्षा केंद्र में प्रवेश कराया गया।

परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें। यदि सत्यापन प्रक्रिया में जानबूझकर गड़बड़ी की जाती है, तो इससे परीक्षा की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

ईओयू ने मामले में मुख्य अभियुक्त प्रमोद कुमार को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की है। आगे की जांच में कथित घटनाक्रम, संबंधित कर्मियों की भूमिका और परीक्षा केंद्र पर अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में अन्य लोगों की गिरफ्तारी या उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।

ईओयू ने पूछताछ के बाद जेल भेजा

आर्थिक अपराध इकाई ने प्रमोद कुमार को गिरफ्तार करने के बाद उससे पूछताछ की। पूछताछ के बाद शनिवार को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का अर्थ है कि आरोपी को आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल में रखा गया है। अब मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों तथा आरोपों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

फिलहाल, प्रमोद कुमार को इस मामले में मुख्य अभियुक्त बताया गया है। उस पर मूल परीक्षार्थी के स्थान पर स्कॉलर को परीक्षा में प्रवेश दिलाने का आरोप है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगी।

नीट परीक्षा की पारदर्शिता से जुड़ा मामला

नीट जैसी प्रवेश परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए परीक्षा केंद्रों पर दस्तावेजों की जांच और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य अनुचित तरीके से परीक्षा में शामिल होने की कोशिशों को रोकना और सभी अभ्यर्थियों के लिए निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

लखीसराय में सामने आया मामला इसी पहचान सत्यापन प्रक्रिया में कथित धांधली से जुड़ा है। आरोप है कि बायोमेट्रिक कर्मियों की मिलीभगत से मूल परीक्षार्थी के स्थान पर स्कॉलर को प्रवेश दिया गया। इस आरोप के बाद आर्थिक अपराध इकाई ने कार्रवाई करते हुए प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में परीक्षा केंद्र का नाम, स्कॉलर की पहचान, संबंधित मूल परीक्षार्थी का विवरण और कथित धांधली के पीछे की पूरी योजना का खुलासा नहीं हुआ है। इन पहलुओं पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

आगे की जांच पर नजर

नीट पुनर्परीक्षा 2026 में बायोमेट्रिक सत्यापन में धांधली के मामले में प्रमोद कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ रही है। ईओयू ने उससे पूछताछ के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

अब मामले में कथित मिलीभगत, परीक्षा केंद्र पर सत्यापन की प्रक्रिया और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, मुख्य अभियुक्त के रूप में प्रमोद कुमार की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। मामले के अन्य पहलुओं पर अंतिम स्थिति जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

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