पटना में बनेगा बिहार का पहला महिला विश्वविद्यालय, मां सीता के नाम पर कैबिनेट की मुहर
पटना। बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दो नए विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पटना में 'मां सीता महिला विश्वविद्यालय' और बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला भी लिया गया है।
पटना में बनने वाला मां सीता महिला विश्वविद्यालय बिहार का पहला महिला विश्वविद्यालय होगा। प्रस्ताव के मुताबिक यह विश्वविद्यालय विशेष रूप से महिलाओं की उच्च शिक्षा को ध्यान में रखकर स्थापित किया जाएगा। राज्य सरकार इससे पहले महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा कर चुकी थी। अब कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसकी स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सरकार का उद्देश्य राज्य की छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराना और उनके लिए एक समर्पित विश्वविद्यालय विकसित करना है।
मां सीता के नाम पर महिला विश्वविद्यालय
पटना में प्रस्तावित महिला विश्वविद्यालय का नाम मां सीता महिला विश्वविद्यालय रखा जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अगस्त में ही राज्य में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की थी। उन्होंने उस समय कहा था कि विश्वविद्यालय में कुलपति से लेकर प्रोफेसर, कर्मचारी और विद्यार्थी तक महिलाएं होंगी।
राज्य सरकार के अनुसार विश्वविद्यालय की स्थापना से महिलाओं को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे। इसके शुरू होने के बाद पाठ्यक्रम, संकाय, प्रशासनिक ढांचे और प्रवेश व्यवस्था से संबंधित विस्तृत नियम उच्च शिक्षा विभाग की ओर से तैयार किए जाएंगे।
सरकार महिला शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए अन्य योजनाओं पर भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने पहले पीएचडी करने वाली महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना का भी उल्लेख किया था।
महिलाओं की उच्च शिक्षा पर फोकस
बिहार में बड़ी संख्या में छात्राएं विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। अलग महिला विश्वविद्यालय बनने से छात्राओं को एक समर्पित उच्च शिक्षण संस्थान उपलब्ध होगा।
विश्वविद्यालय में किन विषयों की पढ़ाई होगी, कितने विभाग होंगे और पहले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत कब होगी, इसकी विस्तृत जानकारी स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ सामने आएगी।
सरकार को विश्वविद्यालय के लिए भूमि, आधारभूत संरचना, शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति तथा शैक्षणिक व्यवस्था से संबंधित प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।
बेगूसराय में दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय
कैबिनेट ने बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जुलाई 2026 में बेगूसराय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी।
रामधारी सिंह दिनकर का जन्म बेगूसराय जिले के सिमरिया में हुआ था। हिंदी साहित्य में उनके योगदान को देखते हुए बिहार सरकार ने उनकी जन्मभूमि वाले जिले में विश्वविद्यालय स्थापित करने का फैसला किया है।
सरकार ने पहले कहा था कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा, शोध, साहित्य और भारतीय चिंतन के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इसकी स्थापना से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
बेगूसराय के छात्रों को मिलेगा फायदा
बेगूसराय में नया विश्वविद्यालय स्थापित होने से जिले और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए नया विकल्प मिलेगा। विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद उसके अधिकार क्षेत्र और उससे संबद्ध होने वाले कॉलेजों को लेकर भी निर्णय लिया जाएगा।
राज्य में पहले से कई विश्वविद्यालय संचालित हैं। नए विश्वविद्यालयों के जरिए सरकार उच्च शिक्षा के संस्थागत ढांचे का विस्तार करना चाहती है।
दिनकर के नाम पर बनने वाले विश्वविद्यालय में साहित्य और शोध से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात पहले की सरकारी घोषणा में कही गई थी।
पशुपालकों के लिए ब्याज मुक्त ऋण योजना
कैबिनेट बैठक में शिक्षा के साथ पशुपालन क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला भी लिया गया। सरकार ने मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना के माध्यम से पशुपालकों को गाय और भैंस खरीदने के लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने का फैसला किया है।
योजना का उद्देश्य पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़े लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत पात्र पशुपालक गाय या भैंस खरीदने के लिए ऋण ले सकेंगे और निर्धारित व्यवस्था के तहत ब्याज का बोझ कम किया जाएगा।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देशों में पात्रता, ऋण की अधिकतम राशि, आवेदन की प्रक्रिया और भुगतान की शर्तें स्पष्ट की जाएंगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नजर
बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन बड़ी संख्या में परिवारों की आय का स्रोत है। गाय और भैंस खरीदने के लिए शुरुआती पूंजी की जरूरत कई छोटे पशुपालकों के लिए चुनौती रहती है।
ब्याज मुक्त ऋण की व्यवस्था लागू होने से पात्र पशुपालकों के लिए पशु खरीदना आसान हो सकता है। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसरों को विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि योजना का वास्तविक लाभ और वित्तीय प्रभाव इसके विस्तृत नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
कैबिनेट के फैसले से उच्च शिक्षा को विस्तार
बुधवार की कैबिनेट बैठक में पटना और बेगूसराय में दो विश्वविद्यालयों को मंजूरी मिलने से बिहार में उच्च शिक्षा के ढांचे में दो नए संस्थान जुड़ने का रास्ता साफ हुआ है।
मां सीता महिला विश्वविद्यालय पूरी तरह महिला उच्च शिक्षा पर केंद्रित होगा, जबकि रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय को बेगूसराय में स्थापित किया जाएगा।
दोनों विश्वविद्यालयों के लिए जमीन, भवन, शैक्षणिक विभाग, पदों के सृजन और वित्तीय प्रावधान से संबंधित आगे की प्रक्रिया संबंधित विभागों को पूरी करनी होगी।
अब स्थापना की प्रक्रिया होगी आगे
कैबिनेट से प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद दोनों विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं आगे बढ़ेंगी। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि विश्वविद्यालय कब से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करेंगे।
पटना में मां सीता महिला विश्वविद्यालय की स्थापना राज्य में महिला उच्च शिक्षा के लिए अलग संस्थागत व्यवस्था तैयार करेगी। वहीं राष्ट्रकवि दिनकर की जन्मभूमि बेगूसराय में उनके नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ आगे बढ़ेगा।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना के जरिए पशुपालकों को गाय-भैंस खरीदने के लिए ब्याज मुक्त ऋण देने का फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार की नई पहल है।