Bihar : कॉलेजों का समय बढ़ाने का सुझाव

Update: 2026-06-19 05:44 GMT

Bihar बिहार: सुधार सम्राट चौधरी ने राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोचिंग में पढ़ाई का समय शाम 8 बजे तक तय किया जाना चाहिए, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सके और उच्च शिक्षा का स्तर और मजबूत हो सके।

गुरुवार को एएन कॉलेज के स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए उन्होंने कॉलेज प्रशासन और शिक्षकों से इस दिशा में सोचने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कॉलेज की प्रिंसिपल रत्ना अमृत से बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने जब कैंपस का समय पूछा तो पता चला कि दोपहर 2 बजे के बाद कॉलेज लगभग खाली हो जाता है। इस स्थिति को उन्होंने एक अवसर के रूप में देखा।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मौजूदा समय-सारणी में बदलाव जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि कॉलेजों में शाम 8 बजे तक कक्षाएं संचालित की जानी चाहिए, ताकि छात्रों को पढ़ाई का अधिक समय और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक विचार नहीं है, बल्कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक व्यावहारिक प्रयास है। उन्होंने कहा, “कृपया यह न सोचें कि मैं सिर्फ बड़ी बातें कर रहा हूं। हम ऐसा सिस्टम बनाना चाहते हैं जिससे यह संभव हो सके।”

सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि वर्तमान में कई छात्र उच्च शिक्षा के लिए बिहार से बाहर, जैसे पंजाब और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जाते हैं। इसका मुख्य कारण वहां बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और अधिक लचीलापन माना जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार को भी अपनी उच्च शिक्षा व्यवस्था को इतना मजबूत बनाना होगा कि छात्रों को बाहर जाने की जरूरत न पड़े।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा प्रणाली को समय के साथ बदलना जरूरी है और इसे छात्रों की जरूरतों के अनुसार ढालना चाहिए। उनका मानना है कि अगर कॉलेजों में पढ़ाई का समय बढ़ाया जाता है, तो इससे छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार होगा।

कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और छात्रों के बीच इस सुझाव को लेकर चर्चा भी देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे सकारात्मक कदम बताया, जबकि कुछ ने संसाधनों और सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत बताई।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले बुनियादी ढांचे, शिक्षक उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी होगा। हालांकि, यह सुझाव राज्य में उच्च शिक्षा सुधार की दिशा में एक नई बहस जरूर शुरू कर सकता है।

कुल मिलाकर, उपमुख्यमंत्री का यह बयान बिहार की शिक्षा नीति में संभावित बदलाव और सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म देता है, जिसमें छात्रों को बेहतर अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

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