बिहार : गोबरसही चौक स्थित एक होटल में रियल एस्टेट कंपनी की महिला मैनेजर निगम कुमारी की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस को एक अहम सुराग मिला है। मृतका के पति मदन कुमार ने मामले के जांच अधिकारी दरोगा राजीव कुमार के मोबाइल पर एक कॉल रिकॉर्डिंग भेजी है। बताया गया है कि यह रिकॉर्डिंग निगम कुमारी की मौत से ठीक पहले अहमदाबाद में उनके एक सहकर्मी के साथ हुई बातचीत की है। इस रिकॉर्डिंग के सामने आने के बाद मामले की जांच में नया मोड़ आया है। अब तक घटना को सामान्य
आत्महत्या
के तौर पर देखा जा रहा था।
निगम कुमारी अहमदाबाद में रियल एस्टेट क्षेत्र में महिला मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं। उनकी संदिग्ध मौत गोबरसही चौक स्थित एक होटल में हुई थी। मौत से पहले सहकर्मी के साथ हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बातचीत का विस्तृत ब्यौरा सामने नहीं आया है। ऐसे में रिकॉर्डिंग में कही गई बातों और मौत की परिस्थितियों के बीच संबंध स्पष्ट होने के बाद ही इस सुराग की भूमिका तय हो सकेगी।
मामले में मृतका के पति मदन कुमार ने जांच अधिकारी तक रिकॉर्डिंग पहुंचाई है। उन्होंने दरोगा राजीव कुमार के मोबाइल पर इसे भेजा है। मौत से ठीक पहले की बातचीत होने के कारण इस रिकॉर्डिंग को अहम माना जा रहा है। इसमें निगम कुमारी ने सहकर्मी से क्या कहा था और बातचीत किस विषय पर हुई थी, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसलिए रिकॉर्डिंग सामने आने को जांच में नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके आधार पर मौत के कारण को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
इस प्रकरण में बेगूसराय जिले के तेघड़ा थाना क्षेत्र के अमजदपुर पिढ़ौली गांव के पूर्व मुखिया प्रभात कुमार की कथित संलिप्तता भी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रभात कुमार घटना के बाद से फरार चल रहा है। उसका नाम सामने आने से मामले में उसकी भूमिका से जुड़े सवाल भी जांच का हिस्सा बन गए हैं। हालांकि, कथित संलिप्तता का स्वरूप क्या है और उसका निगम कुमारी की मौत से किस तरह संबंध बताया जा रहा है, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
पूर्व मुखिया का नाम सामने आने और कॉल रिकॉर्डिंग मिलने के बाद मामले को केवल शुरुआती धारणा के आधार पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। अब तक इसे सामान्य आत्महत्या माना जा रहा था, जबकि नए सुराग ने जांच में एक अतिरिक्त पहलू जोड़ दिया है। फिर भी, जांच की दिशा में बदलाव और घटना की वास्तविक वजह सामने आना अलग-अलग बातें हैं। निगम कुमारी की मौत आत्महत्या थी या परिस्थितियां किसी अन्य वजह की ओर संकेत करती हैं, यह जांच के निष्कर्ष से ही स्पष्ट होगा।
मौत से ठीक पहले किसी व्यक्ति की बातचीत घटनाक्रम समझने में उपयोगी हो सकती है। इस मामले में भी अहमदाबाद के सहकर्मी के साथ हुई बातचीत का समय विशेष महत्व रखता है। लेकिन रिकॉर्डिंग का पूरा संदर्भ सामने आए बिना उसमें दर्ज बातों का अर्थ तय करना संभव नहीं है। बातचीत के दौरान निगम कुमारी की ओर से किसी व्यक्ति का उल्लेख किया गया था या नहीं, किसी परेशानी की चर्चा हुई थी या नहीं, इन बिंदुओं पर उपलब्ध विवरण में कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है।
पति की ओर से उपलब्ध कराई गई रिकॉर्डिंग और पूर्व मुखिया की कथित भूमिका, दोनों इस मामले की अलग-अलग महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। इनके बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि भी जांच में ही होनी है। फिलहाल यह कहना तथ्य से आगे जाना होगा कि रिकॉर्डिंग ने किसी व्यक्ति का दोष साबित कर दिया है। इसी तरह घटना के बाद प्रभात कुमार के फरार होने की जानकारी को उसकी कथित भूमिका की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता। मामले में प्रमाणों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
निगम कुमारी की अहमदाबाद में नौकरी और गोबरसही चौक के होटल में हुई मौत के बीच का घटनाक्रम भी उपलब्ध जानकारी में विस्तार से नहीं बताया गया है। वह होटल कब पहुंची थीं, वहां किन परिस्थितियों में ठहरी थीं और मौत से पहले उनसे किन लोगों का संपर्क हुआ था, इन प्रश्नों के उत्तर इस विवरण में नहीं हैं। इसलिए घटना को लेकर कोई अतिरिक्त कहानी या अनुमान जोड़ने के बजाय सामने आए तथ्यों के आधार पर ही मामले की स्थिति समझी जा सकती है।
फिलहाल इस प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण नया तथ्य मृतका के पति द्वारा जांच अधिकारी को भेजी गई कॉल रिकॉर्डिंग है। इसके साथ ही पूर्व मुखिया प्रभात कुमार की कथित संलिप्तता और घटना के बाद से उसके फरार होने की जानकारी सामने आई है। इन तथ्यों ने निगम कुमारी की संदिग्ध मौत की जांच में नया मोड़ दिया है। रिकॉर्डिंग की बातचीत और अन्य साक्ष्यों से क्या निष्कर्ष निकलता है, इसके आधार पर ही मौत की परिस्थितियों तथा मामले में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
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