Nalanda. नालंदा। डिजिटल ग्रीन इंडिया ने गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के सहयोग और बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति (जीविका-बीआरएलपीएस) के साथ साझेदारी में आज एआई आधारित सलाह के जरिए छोटे डेयरी किसानों को सशक्त बनाने की पहल शुरू की। इस पहल के तहत अगले तीन वर्षों में नालंदा और गया की 24,000 महिला किसानों को सही समय पर भरोसेमंद सलाह दी जाएगी। यह पहल दोनों जिलों के छह प्रखंडों में चलाई जाएगी। इनमें नालंदा के बेन, हरनौत और अस्थावां तथा गया के बोधगया, वजीरगंज और
फतेहपुर शामिल
हैं। इसके लिए डिजिटल ग्रीन का एआई आधारित सहायक फार्मरचैट इस्तेमाल किया जाएगा। इसके माध्यम से किसानों को अपनी भाषा में टेक्स्ट और आवाज के माध्यम से सलाह मिल सकेगी। किसान कीटों और बीमारियों की पहचान में मदद के लिए तस्वीर भी भेज सकेंगे। वे जवाब ऑडियो में सुन सकेंगे और स्थानीय मौसम की जानकारी के साथ खेती और डेयरी से जुड़े कैलेंडर के अनुसार जरूरी अलर्ट भी प्राप्त कर सकेंगे।
इस पहल की शुरुआत के मौके पर जीविका-बीआरएलपीएस के वरिष्ठ अधिकारी, जिला डेयरी विकास और पशुपालन विभागों के अधिकारी, गोदरेज एग्रोवेट और डिजिटल ग्रीन इंडिया के प्रतिनिधि, डेयरी सहकारी समितियाँ और निजी डेयरी कंपनियाँ, जमीनी स्तर पर काम करने वाले विस्तार कार्यकर्ता, पशु सखियाँ और जिले के डेयरी किसान मौजूद रहे।
यह पहल क्यों जरूरी है
खेती से लेकर डेयरी के काम तक, महिलाएँ हमेशा से कृषि का अहम् हिस्सा रही हैं। वे खेतों में काम करने के साथ पशुओं की देखभाल भी करती हैं। पीआईबी के 2025 के आँकड़ों के अनुसार, भारत के डेयरी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों में करीब 70% महिलाएँ हैं। महिलाओं के बीच मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ने के साथ यह पहल उन तक सही समय पर जरूरी सलाह पहुँचाने का अवसर देती है। इसके लिए उन सामुदायिक नेटवर्क और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की मदद ली जाएगी, जिन पर महिलाएँ पहले से भरोसा करती हैं।
इस पहल के तहत क्या किया जाएगा
पहले साल 12,000 महिला किसानों तक पहुँच स्थापित की जाएगी और पूरी पहल के अंत तक यह संख्या 24,000 तक बढ़ाई जाएगी।
पहले साल जमीनी स्तर पर काम करने वाले 185 विस्तार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। दूसरे और तीसरे साल में हर साल 92 और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे महिला किसानों को फार्मरचैट इस्तेमाल करना सिखा सकें और इसे आत्मविश्वास के साथ इस्तेमाल करने में उनकी मदद कर सकें।
महिला किसानों को खेती से जुड़े फैसले खुद लेने का भरोसा दिलाया जाएगा और मौसम में होने वाले बदलावों से जुड़े जोखिमों की बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी।
तीसरे साल तक महिला किसानों की डेयरी से होने वाली आय में 12 से 15% की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल ग्रीन इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि भसीन ने कहा, “गोदरेज एग्रोवेट के सहयोग और जीविका के साथ हमारी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के आधार पर, हम नालंदा और गया की हजारों महिला डेयरी किसानों तक फार्मरचैट पहुँचा रहे हैं। भारत के डेयरी क्षेत्र में ज्यादातर काम महिलाएँ करती हैं, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह अक्सर सीधे उन तक नहीं पहुँच पाती। बिहार में हमारे पहले के काम से पता चला है कि जब यह सलाह महिलाओं तक पहुँचती है, तो वे ज्यादा आत्मविश्वास के साथ फैसले लेती हैं। इस पहल के माध्यम से महिलाओं को उनकी अपनी भाषा में, भरोसेमंद सलाह सही समय पर मिलेगी। जब टेक्नोलॉजी, समुदाय और उद्योग एक साथ काम करते हैं, तो इससे पशुओं की सेहत बेहतर होती है, महिलाओं की आय बढ़ती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनती है।”
जीविका-बीआरएलपीएस के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक (पशुधन) डॉ. राकेश कुमार सिंह ने कहा, "पिछले 20 वर्षों से जीविका बिहार की महिला किसानों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। हमने शुरुआत खेती की उत्पादकता बढ़ाने से की थी और आज हमारी महिलाएँ ऐसी उत्पादक कंपनियाँ संचालित कर रही हैं, जो उत्पादन और मार्केटिंग सहित कई काम संभालती हैं। यह प्रोजेक्ट इसी सफर को आगे बढ़ाते हुए जीविका की महिला किसानों के लिए आय और लाभ का एक नया अवसर लेकर आया है, जिसमें एआई आधारित सलाह दी जाएगी। मुझे खुशी है कि गोदरेज एग्रोवेट के सहयोग से 24,000 महिला डेयरी किसानों के लिए शुरू किए जा रहे इस प्रोजेक्ट के लॉन्च कार्यक्रम का हिस्सा बना। मैं सभी महिलाओं की सफलता की कामना करता हूँ। यदि इसका पायलट सफल रहता है, तो हम इसे पूरे बिहार में विस्तार देने की दिशा में काम करना चाहेंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएँ इसका लाभ उठा सकें।"
गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के एनिमल न्यूट्रिशन बिजनेस के सीईओ कैप्टन (डॉ.) ए. वाई. राजेंद्र ने कहा, “डेयरी फार्मिंग भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम् हिस्सा है और गोदरेज एग्रोवेट के एनिमल न्यूट्रिशन बिजनेस के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र में महिलाओं की अहम् भूमिका को देखते हुए, इस पहल का उद्देश्य एआई आधारित समाधानों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों के प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें सही समय पर भरोसेमंद सलाह उपलब्ध कराना है। महिला किसानों को जानकारी और आत्मविश्वास देकर हम डेयरी उत्पादकता बढ़ाने, उनकी आजीविका मजबूत करने और ग्रामीण समुदायों को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करना चाहते हैं।”
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