ADG का बयान, संजीव हंस और पवन जल्द होंगे गिरफ्तार

Update: 2026-06-24 12:32 GMT

Bihar: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों के खिलाफ करीब 4000 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है। जांच एजेंसी का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता, कमीशनखोरी और सरकारी अधिकारियों को प्रभावित करने के ठोस सबूत मिले हैं। SVU के अनुसार जांच के दौरान कई डिजिटल, दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर आरोपियों को नामजद किया गया है।

इस मामले में टेंडर माफिया रिशु श्री, IAS अधिकारी संजीव हंस, संतोष कुमार, पवन कुमार समेत अन्य लोगों की भूमिका सामने आई है। इसके अलावा मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह के खिलाफ भी पर्याप्त साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि टेंडर दिलाने के बदले 7 से 10 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता था और यह रकम विभिन्न स्तरों पर बांटी जाती थी।

SVU ने बताया कि जांच के दौरान सहरसा, सीतामढ़ी सहित कई जिलों में छापेमारी की गई, जहां से अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाए गए। गवाहों के बयान दर्ज किए गए और डिजिटल डेटा की भी जांच की गई। एजेंसी का कहना है कि मोबाइल डेटा और वित्तीय रिकॉर्ड से लेनदेन के कई सबूत मिले हैं।

छापेमारी के दौरान रिशु श्री के ठिकानों से 61 संपत्तियों के दस्तावेज बरामद होने का दावा किया गया है। इसके अलावा करोड़ों रुपये के आभूषण और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड भी मिले हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि कुछ ही वर्षों में उनकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि देखी गई है।

SVU के एडीजी पंकज दराद ने बताया कि IAS संजीव हंस और पवन कुमार फिलहाल फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। वहीं, दो अन्य IAS अधिकारियों अभिलाषा शर्मा और योगेश कुमार सागर को भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजा गया है। एजेंसी का कहना है कि अभी तक उनकी सीधी भूमिका के पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन जांच जारी है।

इसके अलावा वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी और भवन निर्माण विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर तारिणी दास पर भी टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और कमीशन लेने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं बुडको के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह के ठिकानों से करीब 1 करोड़ रुपये नकद मिलने का दावा भी जांच में किया गया है।

SVU का कहना है कि यह मामला अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले समय में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। एजेंसी के अनुसार चार्जशीट में शामिल सभी सात आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और इसी आधार पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। मामले की आगे की सुनवाई और जांच पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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