आठ साल से कायम भाई बहन का अनोखा रिश्ता पूर्व DM कंवल तनुज को भेजी राखी
औरंगाबाद की बहनों ने पूर्व डीएम कंवल तनुज को राखी भेजी
औरंगाबाद: सरकारी अधिकारियों का तबादला होता रहता है, जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं और शहर भी पीछे छूट जाते हैं, लेकिन कुछ रिश्ते पद और दूरी से कहीं ऊपर होते हैं। बिहार के औरंगाबाद से जुड़ी ऐसी ही भावुक कहानी एक बार फिर रक्षाबंधन के मौके पर सामने आई है। यहां की महिलाओं ने IAS अधिकारी कंवल तनुज को लगातार आठवीं बार राखियां भेजकर वर्षों पुराने भाई-बहन के रिश्ते को कायम रखा है।
कंवल तनुज कभी औरंगाबाद के जिलाधिकारी रहे थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने के साथ स्थानीय लोगों से संवाद और जुड़ाव बनाया। इसी दौरान जिले की कई महिलाओं ने उन्हें भाई माना। समय बीता, उनका तबादला हुआ और नई जिम्मेदारियां मिलीं, लेकिन रक्षाबंधन पर शुरू हुआ यह रिश्ता खत्म नहीं हुआ।
हर साल रक्षाबंधन नजदीक आते ही औरंगाबाद की इन बहनों को अपने IAS भाई की याद आती है। वे राखी के साथ अपनी शुभकामनाएं भेजती हैं। इस बार भी महिलाओं ने कंवल तनुज के लिए राखियां भेजकर उनके स्वस्थ, सुरक्षित और सफल जीवन की कामना की है। इस रिश्ते की सबसे खास बात इसकी निरंतरता है। प्रशासनिक अधिकारी किसी जिले में सीमित अवधि के लिए तैनात रहते हैं और तबादले के बाद अक्सर उनका सीधा संपर्क कम हो जाता है। इसके बावजूद आठ वर्षों से राखी भेजा जाना बताता है कि औरंगाबाद में कंवल तनुज के कार्यकाल के दौरान बना रिश्ता केवल प्रशासनिक नहीं रह गया था।
महिलाओं के लिए रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई के प्रति स्नेह और विश्वास व्यक्त करने का अवसर है। यही वजह है कि दूरी होने के बावजूद वे हर साल राखी भेजकर इस परंपरा को निभाती आ रही हैं। पद और तैनाती बदलने के बाद भी उनका अपनापन पहले की तरह कायम है।
कंवल तनुज की पहचान बिहार के चर्चित IAS अधिकारियों में रही है। औरंगाबाद में तैनाती के दौरान प्रशासन और आम लोगों के बीच संवाद को लेकर उनके कई प्रयास चर्चा में रहे। इसी दौरान स्थानीय महिलाओं के साथ भाई-बहन जैसा भावनात्मक जुड़ाव विकसित हुआ, जो आज भी जारी है।
रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। आम तौर पर यह रिश्ता परिवार के भीतर देखने को मिलता है, लेकिन औरंगाबाद की यह कहानी सामाजिक रिश्तों की अलग तस्वीर पेश करती है। यहां न खून का रिश्ता है और न ही अब एक ही शहर में मौजूदगी, फिर भी राखी की डोर वर्षों से दोनों पक्षों को जोड़े हुए है। आठवीं बार राखी भेजने वाली बहनों के लिए कंवल तनुज आज भी उसी तरह भाई हैं, जैसे औरंगाबाद में उनकी तैनाती के दौरान थे। त्योहार के मौके पर राखियों के साथ भेजी गई शुभकामनाएं इस बात की गवाही देती हैं कि कुछ रिश्तों की पहचान सरकारी पद या स्थान से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और सम्मान से होती है।
रक्षाबंधन के मौके पर सामने आई यह कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर सकती है। प्रशासनिक सेवा में जहां अधिकारियों और जनता का रिश्ता आमतौर पर सरकारी कामकाज तक सीमित दिखाई देता है, वहीं यह उदाहरण उस रिश्ते के मानवीय पहलू को सामने लाता है।
कंवल तनुज का पद बदल गया, तैनाती का शहर बदल गया और समय भी आठ साल आगे निकल गया, लेकिन औरंगाबाद की इन बहनों के लिए भाई से जुड़ा स्नेह नहीं बदला। हर साल पहुंचने वाली राखी इसी पुराने रिश्ते को फिर ताजा कर देती है और बताती है कि दूरी चाहे जितनी हो, अपनापन बना रहे तो रिश्तों की डोर कमजोर नहीं पड़ती।