बिहार में बनेगा शानदार इको-टूरिज्म हब, कुकुरझप डैम पर विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं
जमुई। बिहार में पर्यटन को नई पहचान देने और प्राकृतिक स्थलों को आकर्षक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में जमुई जिले के बरहट प्रखंड स्थित कुकुरझप डैम को अत्याधुनिक इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत बिहार इको टूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी ने इस परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। पहाड़ों, घने जंगलों और जलाशय से घिरे इस क्षेत्र में प्रकृति आधारित पर्यटन, मनोरंजन और साहसिक गतिविधियों की संभावनाएं हैं। परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर विकसित करने की योजना है।
कुकुरझप डैम बनेगा इको-टूरिज्म का प्रमुख केंद्र
जमुई जिले का कुकुरझप डैम अपने प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है।
यह जलाशय बरहट प्रखंड में स्थित है। इसके आसपास घने जंगल, पहाड़ियां और प्राकृतिक वनस्पति मौजूद हैं।
राज्य सरकार अब इस क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं का उपयोग करने की दिशा में काम कर रही है।
योजना के तहत डैम और आसपास के क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
इससे पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के साथ मनोरंजन और विश्राम की सुविधाएं मिल सकेंगी।
24.43 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए निविदा
परियोजना से संबंधित निविदा विवरण के अनुसार, कुकुरझप जलाशय और अंजन डैम क्षेत्र में एकीकृत इको-टूरिज्म, वेलनेस और एडवेंचर पर्यटन स्थल विकसित करने की योजना बनाई गई है।
इस परियोजना का अनुमानित निविदा मूल्य लगभग 24.43 करोड़ रुपये बताया गया है।
निविदा 16 अक्टूबर 2026 को जारी की गई है और बोलियां जमा करने की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण मॉडल पर प्रस्तावित है।
हालांकि, निविदा जारी होने का अर्थ निर्माण कार्य शुरू होना नहीं है। कार्य आवंटन और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही वास्तविक निर्माण की स्थिति स्पष्ट होगी।
पर्यटकों को मिल सकती हैं आधुनिक सुविधाएं
कुकुरझप डैम को इको-टूरिज्म हब बनाने के लिए पर्यटन से जुड़ी कई सुविधाओं की संभावनाओं पर विचार किया गया है।
परियोजना का उद्देश्य ऐसे बुनियादी ढांचे का विकास करना है, जिससे पर्यटक प्राकृतिक वातावरण का आनंद सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से ले सकें।
यहां पर्यटकों के ठहरने, भोजन, भ्रमण और मनोरंजन से जुड़ी सुविधाओं को विकसित करने की संभावनाएं हैं।
इसके अलावा प्राकृतिक दृश्यों को देखने के लिए निर्धारित स्थान और पर्यटकों की आवाजाही के लिए व्यवस्थित मार्ग विकसित किए जा सकते हैं।
इन सुविधाओं का अंतिम स्वरूप स्वीकृत परियोजना योजना और निर्माण संबंधी निर्णयों पर निर्भर करेगा।
बोटिंग और साहसिक पर्यटन की संभावना
कुकुरझप जलाशय में बोटिंग और शांत वातावरण में प्रकृति का आनंद लेने की संभावनाएं मौजूद हैं।
राज्य सरकार की परियोजना संबंधी प्रारंभिक अभिरुचि दस्तावेज में भी जलाशय को नौकायन और प्रकृति आधारित मनोरंजन के लिए उपयुक्त बताया गया है।
इसके साथ ही आसपास के जंगल और पहाड़ी इलाके साहसिक पर्यटन की गतिविधियों के लिए संभावनाएं प्रदान करते हैं।
हालांकि, बोटिंग या अन्य गतिविधियों की अनुमति सुरक्षा, पर्यावरणीय नियमों और संबंधित विभागों की मंजूरी पर निर्भर करेगी।
मोर और अन्य वन्यजीव भी हैं क्षेत्र का आकर्षण
कुकुरझप डैम के आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
सरकारी परियोजना दस्तावेज के अनुसार, यहां मोरों सहित विभिन्न वन्यजीवों की मौजूदगी है।
जलाशय में कभी-कभी मगरमच्छ देखे जाने का भी उल्लेख किया गया है।
ऐसे में पर्यटन सुविधाएं विकसित करते समय पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा।
वन्यजीवों के आवास वाले क्षेत्रों में अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों से बचना जरूरी है।
जमुई रेलवे स्टेशन से लगभग 13 किलोमीटर दूर
कुकुरझप डैम की एक विशेषता इसकी सड़क और रेल संपर्क सुविधा भी है।
परियोजना दस्तावेज के अनुसार, यह स्थल राष्ट्रीय राजमार्ग-333 से लगभग सात किलोमीटर दूर है।
वहीं, जमुई रेलवे स्टेशन की दूरी करीब 13 किलोमीटर बताई गई है।
सड़क मार्ग से यहां तक पहुंचने के लिए लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण संपर्क मार्ग मौजूद हैं।
पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ सड़क संपर्क बेहतर होने से पर्यटकों की आवाजाही आसान हो सकती है।
स्थानीय युवाओं को मिल सकते हैं रोजगार के अवसर
इको-टूरिज्म हब विकसित होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।
पर्यटन स्थलों पर होटल, भोजनालय, स्थानीय परिवहन, पर्यटन मार्गदर्शन और हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों की मांग बढ़ सकती है।
इससे आसपास के गांवों के युवाओं और छोटे उद्यमियों को रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि, रोजगार की वास्तविक संख्या और आर्थिक लाभ परियोजना पूरी होने तथा पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
पर्यावरण संरक्षण को दी जाएगी प्राथमिकता
राज्य सरकार ने इको-टूरिज्म के विकास में पर्यावरण संरक्षण को महत्वपूर्ण स्थान दिया है।
पर्यटन गतिविधियों के दौरान जलाशय की स्वच्छता, प्लास्टिक कचरे के नियंत्रण और प्राकृतिक वनस्पतियों की सुरक्षा पर ध्यान देना आवश्यक होगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 17 मई 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को जलाशयों के आसपास सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल से इको-टूरिज्म विकसित करने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने जलाशयों के आसपास पौधारोपण और पर्यटन सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया था।
बिहार के पर्यटन मानचित्र पर बढ़ेगा जमुई का महत्व
जमुई जिले में कुकुरझप डैम के अलावा कई प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थल मौजूद हैं।
इनमें नागी पक्षी आश्रयणी, सिमुलतला और विभिन्न झरने तथा वन क्षेत्र शामिल हैं।
इन स्थलों को बेहतर सुविधाओं और संपर्क मार्गों से जोड़ने पर जिले में पर्यटन गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
कुकुरझप डैम का विकास इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
परियोजना के पूरा होने का इंतजार
कुकुरझप डैम को आधुनिक इको-टूरिज्म हब बनाने की योजना से जमुई जिले में पर्यटन विकास की नई उम्मीदें जगी हैं।
फिलहाल परियोजना निविदा और कार्य आवंटन की प्रक्रिया से जुड़ी है। निर्माण शुरू होने और पर्यटन सुविधाओं के संचालन की अंतिम तारीख अभी स्पष्ट नहीं है।
आने वाले समय में परियोजना को मंजूरी और कार्य आवंटन मिलने के बाद विकास कार्य आगे बढ़ सकेंगे।
यदि योजना पर्यावरणीय संतुलन और सुरक्षा मानकों के साथ पूरी होती है, तो कुकुरझप डैम बिहार के प्रमुख प्रकृति आधारित पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना सकता है।