किशनपुर के स्कूलों में 76 बच्चे अनुपस्थित, रिकॉर्ड की जांच की मांग
सरकारी स्कूलों की हाजिरी पर सवाल
सुपौल: बिहार के सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड में सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। छह विद्यालयों में कुल 239 बच्चों के नामांकन के मुकाबले केवल 163 बच्चों की मौजूदगी की जानकारी सामने आई है। इस तरह नामांकित बच्चों की संख्या और वास्तविक उपस्थिति के बीच 76 बच्चों का अंतर पाया गया है। इस स्थिति ने सरकारी विद्यालयों में नियमित उपस्थिति, शैक्षणिक व्यवस्था और बच्चों को स्कूल तक लाने के प्रयासों पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, किशनपुर प्रखंड के छह विद्यालयों में नामांकन के मुकाबले बच्चों की उपस्थिति कम रही। कुल 239 बच्चों में से 163 की मौजूदगी का मतलब है कि करीब 68 प्रतिशत बच्चे उपस्थित थे, जबकि लगभग 32 प्रतिशत अनुपस्थित रहे। हालांकि इन छह विद्यालयों के नाम और अलग-अलग स्कूलों की उपस्थिति का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी स्पष्ट नहीं है।
सरकारी स्कूलों में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के साथ यह भी जरूरी है कि बच्चे प्रतिदिन कक्षाओं में पहुंचें और निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई करें। यदि नामांकन के मुकाबले उपस्थिति लगातार कम रहती है तो इसका असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास पर पड़ सकता है।
किशनपुर में इससे पहले भी विद्यालयों में कम उपस्थिति का मामला सामने आ चुका है। अगस्त 2026 में क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक मोहम्मद सईद अंसारी ने किशनपुर और पिपरा प्रखंड के विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान कई स्कूलों में नामांकन के मुकाबले बच्चों की उपस्थिति कम मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई थी। संबंधित प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को व्यवस्था में सुधार लाने के निर्देश दिए गए थे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बच्चों की नियमित उपस्थिति जरूरी है। शिक्षकों को अभिभावकों के साथ बैठक आयोजित करने और उन्हें बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजने के लिए जागरूक करने का निर्देश दिया गया था। विद्यालयों में साफ-सफाई और शैक्षणिक वातावरण बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया। बिहार में सरकारी स्कूलों की उपस्थिति व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। सुपौल में मई 2026 के दौरान शिक्षा विभाग ने विद्यालयों में टैबलेट के माध्यम से बच्चों की दैनिक हाजिरी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इसका उद्देश्य वास्तविक उपस्थिति का रिकॉर्ड तैयार करना और गलत आंकड़ों की संभावना को कम करना है।
विद्यालयों में उपस्थिति का मामला मध्याह्न भोजन योजना से भी जुड़ा हुआ है। सितंबर 2026 में सुपौल के तीन विद्यालयों में प्रधानमंत्री पोषण योजना से संबंधित अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच में दर्ज उपस्थिति और वास्तविक रूप से मौजूद बच्चों की संख्या में अंतर मिलने पर संबंधित प्रधानाध्यापकों से करीब 6.51 लाख रुपये की वसूली का आदेश दिया गया था। हालांकि यह एक अलग मामला था और इसका किशनपुर के इन छह विद्यालयों से संबंध स्थापित नहीं हुआ है। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों का मानना है कि बच्चों की अनुपस्थिति के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें पारिवारिक परिस्थितियां, बीमारी, मौसमी समस्याएं, स्कूल से दूरी और पढ़ाई में रुचि की कमी शामिल हो सकती हैं। वास्तविक कारण जानने के लिए विद्यालयवार उपस्थिति के रिकॉर्ड और अभिभावकों से बातचीत जरूरी है।
किशनपुर के छह विद्यालयों में सामने आए आंकड़ों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि नामांकन फर्जी है या हाजिरी में गड़बड़ी की गई है। इसके लिए वास्तविक नामांकन रजिस्टर, दैनिक उपस्थिति और अन्य रिकॉर्ड का मिलान आवश्यक होगा। फिलहाल 239 नामांकित बच्चों में से केवल 163 की उपस्थिति का आंकड़ा सरकारी स्कूलों में नियमित पढ़ाई और निगरानी को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि और संबंधित विद्यालयों की जांच का विवरण सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।