गुवाहाटी: ज़ुबीन गर्ग असम के लिए केवल एक गायक नहीं थे। उनकी आवाज़ संगीत से आगे बढ़कर एक पूरी पीढ़ी की भावनाओं, असमिया पहचान और सामाजिक सरोकारों से जुड़ गई थी। तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने लोक संगीत, बिहू, रोमांटिक गीत, रॉक और फिल्म संगीत सहित कई शैलियों में काम किया। 1992 में आए उनके असमिया एल्बम ‘अनामिका’ ने उन्हें शुरुआती पहचान दिलाई, जबकि 2006 में फिल्म Gangster के गीत ‘या अली’ ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बनाया।
संगीत से आगे थी ज़ुबीन की पहचान
ज़ुबीन गायक होने के साथ संगीतकार, गीतकार, अभिनेता, फिल्म निर्माता और कई वाद्ययंत्र बजाने वाले कलाकार भी थे। उनकी खासियत यह थी कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के बावजूद उनका जुड़ाव असम और पूर्वोत्तर से बना रहा। उनके असमिया गीत घरों से लेकर कॉलेजों, बिहू समारोहों और बड़े मंचों तक लगातार सुनाई देते रहे।
उनके गीतों में प्रेम और विरह के साथ प्रकृति, युवाओं की भावनाएं और सामाजिक सवाल भी जगह पाते थे। इसी वजह से असम में उनकी लोकप्रियता सिर्फ किसी फिल्मी सितारे जैसी नहीं रही, बल्कि उनकी आवाज़ सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गई।
सामाजिक मुद्दों पर भी मुखर रहे
ज़ुबीन गर्ग सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी बात खुलकर रखने के लिए भी जाने जाते थे। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ असम में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जाहिर की और विरोध कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उनके इस पक्ष को लेकर समर्थन और आलोचना दोनों सामने आए, लेकिन सार्वजनिक मुद्दों पर उनकी मुखरता उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
बाढ़ जैसी आपदाओं के समय सहायता जुटाने और जरूरतमंद लोगों की मदद से भी उनका नाम जुड़ा रहा। उनके सामाजिक कार्यों और संगीत ने प्रशंसकों के साथ उनके रिश्ते को मंच और रिकॉर्डिंग स्टूडियो से कहीं आगे पहुंचाया।
2025 में थम गई आवाज़
19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में ज़ुबीन गर्ग का निधन हो गया। वह 52 वर्ष के थे। उनकी मौत के बाद असम में बड़े पैमाने पर शोक देखने को मिला। सितंबर 2026 में उनकी पहली पुण्यतिथि पर भी हजारों प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए और उनके गीतों के जरिए उन्हें याद किया।
आज भी लोगों के बीच जिंदा हैं गीत
ज़ुबीन गर्ग की मृत्यु के एक साल बाद भी असम में उनके संगीत का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। युवाओं के लिए उनके कई गीत बचपन, कॉलेज के दिनों, दोस्ती और निजी यादों से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि उनकी आवाज़ अलग-अलग पीढ़ियों के लिए अलग-अलग यादों को अपने साथ लेकर चलती है।
ज़ुबीन की विरासत को केवल उनके हिट गानों की संख्या से समझना मुश्किल है। असम में उनका प्रभाव संगीत, सिनेमा, सामाजिक सरोकार और सांस्कृतिक पहचान तक फैला रहा। उनकी आवाज़ भले ही अब नए गीत रिकॉर्ड नहीं कर सकती, लेकिन उनके पुराने गीत और उनसे जुड़ी स्मृतियां आज भी सुनाई देती हैं।