गुवाहाटी : जेल का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में बंद दीवारों और सख्त नियमों की तस्वीर आती है, लेकिन अब कई जेलों में कैदियों के सुधार और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। असम की जेलों में भी वॉलीबॉल जैसे खेलों का इस्तेमाल कैदियों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए किया जाता है।
वॉलीबॉल खेलने से कैदियों को शारीरिक व्यायाम मिलता है और वे तनाव कम कर पाते हैं। जेल प्रशासन का मानना है कि खेल अनुशासन, टीम भावना और आपसी सहयोग की भावना विकसित करने में मदद करते हैं।
खेल से बदलती है जेल की जिंदगी
जेलों में खेल गतिविधियों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं होता, बल्कि कैदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना भी होता है। वॉलीबॉल, फुटबॉल, कबड्डी और अन्य खेलों के जरिए कैदियों को स्वस्थ माहौल देने की कोशिश की जाती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर
लंबे समय तक जेल में रहने से कई कैदी तनाव और मानसिक दबाव का सामना करते हैं। खेल गतिविधियां उन्हें ऊर्जा का सही उपयोग करने और मानसिक रूप से सक्रिय रहने में मदद करती हैं।
जेल सुधार कार्यक्रमों का हिस्सा
देशभर की कई जेलों में खेल, शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जाते हैं। इसका उद्देश्य कैदियों को सजा के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास का अवसर देना होता है।
असम की जेलों में भी ऐसी गतिविधियां कैदियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करने की दिशा में एक कदम मानी जाती हैं।
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