गुवाहाटी। पत्नी रिया तालुकदार की हत्या के आरोपी रामानुज गोस्वामी की सोमवार तड़के संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार मेडिकल जांच के लिए गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाते समय रामानुज ने नरकासुर पहाड़ी के पास चलती पुलिस गाड़ी से कथित रूप से छलांग लगा दी। इस दौरान उसके सिर में गंभीर चोट आई और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

बताया गया है कि रामानुज गोस्वामी सात दिनों से पुलिस रिमांड पर था। रविवार को उसकी रिमांड अवधि समाप्त हो गई थी और सोमवार को उसे अदालत के समक्ष पेश किया जाना था। अदालत में पेशी से पहले मेडिकल जांच के लिए उसे पुलिस सुरक्षा में गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में यह घटना हुई।

पुलिस सूत्रों का दावा है कि नरकासुर पहाड़ी के पास पहुंचने पर रामानुज ने अचानक चलती गाड़ी से बाहर छलांग लगा दी। सड़क पर गिरने के कारण उसके सिर में गंभीर चोट लगी। इसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया अथवा इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस संबंध में आधिकारिक घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी आना बाकी है।

आरोपी की पुलिस अभिरक्षा के दौरान मौत होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हिरासत में मौजूद आरोपी चलती गाड़ी से बाहर निकलने में कैसे सफल हुआ। उसे किस प्रकार के वाहन में ले जाया जा रहा था वाहन में कितने पुलिसकर्मी मौजूद थे और सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे इन तथ्यों की जांच जरूरी होगी।

यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक होगा कि आरोपी को हथकड़ी लगाई गई थी या नहीं और वह वाहन में किस स्थान पर बैठा था। पुलिस वाहन के दरवाजे सुरक्षित तरीके से बंद थे या नहीं इसकी जांच भी महत्वपूर्ण होगी। यदि वाहन में सीसीटीवी कैमरा लगा था तो उसकी फुटेज घटना का वास्तविक क्रम समझने में अहम साक्ष्य बन सकती है।

पुलिस को घटनास्थल का निरीक्षण कर सड़क और वाहन से संबंधित साक्ष्य जुटाने होंगे। नरकासुर पहाड़ी क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा सकती है। आसपास मौजूद लोगों या वाहन चालकों ने घटना देखी हो तो उनके बयान मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

रामानुज गोस्वामी पर अपनी पत्नी रिया तालुकदार की बेरहमी से हत्या करने का आरोप था। हालांकि अदालत में दोष सिद्ध होने से पहले उसे कानूनी रूप से आरोपी ही कहा जाएगा। हत्या के मामले में उससे पूछताछ के लिए पुलिस ने रिमांड प्राप्त की थी। सात दिन की रिमांड पूरी होने के बाद उसे दोबारा न्यायालय में पेश किया जाना था लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत हो गई।

आरोपी की मृत्यु के कारण अब पत्नी की हत्या से जुड़े मामले की जांच पर भी असर पड़ सकता है। पुलिस ने रिमांड के दौरान उससे क्या जानकारी हासिल की और उसके बयान के आधार पर कौन से साक्ष्य जुटाए गए इसकी समीक्षा की जाएगी। यदि मामले में कोई अन्य व्यक्ति शामिल होने की आशंका थी तो जांच अब उपलब्ध भौतिक डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।

पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से प्राप्त जानकारी अदालत में तभी महत्वपूर्ण होती है जब उसके आधार पर कोई वस्तु या अन्य साक्ष्य बरामद हो। आरोपी की मौत के बाद उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया समाप्त हो सकती है लेकिन घटना से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए जांच जारी रह सकती है।

अभिरक्षा में किसी व्यक्ति की मौत अत्यंत संवेदनशील विषय मानी जाती है। ऐसे मामलों में मृत्यु के कारण और पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी होती है। शव का पोस्टमार्टम कर चोटों की प्रकृति और मौत के वास्तविक कारण का पता लगाया जाएगा। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी और स्वतंत्र चिकित्सा जांच पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है।

घटना की सूचना आरोपी के परिवार को दिए जाने और शव की पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी किए जाने की भी आवश्यकता होगी। परिजनों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं। यदि परिवार पुलिस के दावे पर सवाल उठाता है तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है।

इस घटना में पुलिसकर्मियों की संभावित लापरवाही की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। किसी आरोपी को अदालत या अस्पताल ले जाते समय सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है। वाहन में मौजूद प्रत्येक कर्मचारी से अलग-अलग पूछताछ कर यह पता लगाया जा सकता है कि घटना के समय कौन कहां बैठा था और रामानुज ने अचानक गाड़ी से कैसे छलांग लगाई।

घटना में इस्तेमाल वाहन की तकनीकी और फोरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है। दरवाजे की लॉकिंग प्रणाली खिड़कियों की स्थिति और वाहन के भीतर बैठने की व्यवस्था का निरीक्षण जरूरी होगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि आरोपी ने दरवाजा स्वयं खोला या सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी।

वाहन की गति भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने चलती गाड़ी से छलांग लगाई लेकिन उस समय वाहन कितनी गति से चल रहा था इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। वाहन के जीपीएस रिकॉर्ड आसपास के कैमरों और चालक के बयान से गति तथा मार्ग का सत्यापन हो सकता है।

नरकासुर पहाड़ी के पास हुई घटना के समय से लेकर आरोपी को अस्पताल पहुंचाने तक का पूरा समय दर्ज किया जाना जरूरी होगा। किस समय वह वाहन से कूदा कब उसे अस्पताल पहुंचाया गया और चिकित्सकों ने कब उसकी मौत की पुष्टि की इन सभी तथ्यों से घटनाक्रम स्पष्ट होगा।

मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान के साथ अस्पताल के रिकॉर्ड एंबुलेंस या पुलिस वाहन का विवरण और घटनास्थल से प्राप्त प्रमाण महत्वपूर्ण होंगे। यदि आरोपी को चोट लगने के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार दिया गया था तो उसका विवरण भी सामने आना चाहिए।

हिरासत में मौत के मामलों में कानून के अनुसार आवश्यक जांच प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। इस घटना में मजिस्ट्रियल या अन्य स्वतंत्र जांच कराई जाएगी या नहीं इसकी आधिकारिक घोषणा फिलहाल सामने नहीं आई है। निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच का स्वरूप सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ सकती है।

रामानुज की मौत के बाद रिया तालुकदार हत्या मामले से जुड़े कई प्रश्न भी अधूरे रह सकते हैं। पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि सात दिन की रिमांड में कौन से साक्ष्य मिले और हत्या की कथित वजह क्या थी। पीड़िता के परिवार को मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी देना भी जरूरी होगा।

फिलहाल आरोपी की मौत का विवरण मुख्य रूप से पुलिस सूत्रों के दावे पर आधारित है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीसीटीवी फुटेज वाहन की जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रामानुज की मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस अभिरक्षा में हुई इस घटना की निष्पक्ष जांच से ही उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकेगा।

Tags: