बोडो संस्कृति का अपमान: 'Bagurumba.com' के खिलाफ कोकराझार में FIR दर्ज

Update: 2026-04-02 15:08 GMT
Kokrajhar: बोडो समुदाय की विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक विरासत और उनके पारंपरिक नृत्य 'बगुरुंबा' (Bagurumba) के गलत चित्रण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बोडो संस्कृति और कला के संरक्षण के लिए समर्पित प्रमुख संस्था 'दुलाराई बोरो हरिमु अफाद' (Dularai Boro Harimu Afad) ने इस संबंध में सख्त रुख अपनाते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। संगठन ने 'Bagurumba.com' नामक एक वेबसाइट पर उनकी संस्कृति को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
अध्यक्ष के नेतृत्व में दी गई आधिकारिक शिकायत
यह शिकायत गुरुवार, 2 अप्रैल को कोकराझार सदर पुलिस स्टेशन में औपचारिक रूप से सौंपी गई। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष बिजितगिरी बसुमतारी (Bijitgiri Basumatary) ने किया। शिकायत पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वेबसाइट ने न केवल समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है, बल्कि पारंपरिक नृत्य के स्वरूप को भी विकृत किया है।
मुख्य आरोप: परंपरा और गरिमा का उल्लंघन
संगठन का आरोप है कि 'Bagurumba.com' द्वारा प्रसारित सामग्री बोडो समाज की गौरवशाली परंपराओं के प्रतिकूल है। आपत्ति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
नृत्य का गलत चित्रण: पारंपरिक बगुरुंबा नृत्य, जिसे उसकी शालीनता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, उसे गलत तरीके से प्रदर्शित किया गया है।
व्यावसायिक दुरुपयोग: वेबसाइट द्वारा सांस्कृतिक नाम का उपयोग अनुचित तरीके से करके भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है।
वेशभूषा का अपमान: बोडो महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा 'डोखना' और 'ज्वमग्रा' की गरिमा को ठेस पहुँचाने का भी आरोप लगाया गया है।
सांस्कृतिक रक्षक के रूप में 'हरिमु अफाद' की भूमिका
मीडिया से बात करते हुए अध्यक्ष बिजितगिरी बसुमतारी ने कहा, "बगुरुंबा केवल एक लोक नृत्य नहीं है, यह हमारी पूर्वजों से मिली अनमोल विरासत है। किसी भी निजी वेबसाइट को हमारे समुदाय के नाम और नृत्य का इस्तेमाल गलत संदर्भ में करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हमने पुलिस से इस साइट पर तुरंत प्रतिबंध लगाने और दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग की है।"
पुलिस जांच और साइबर कानून
कोकराझार सदर पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले को आईटी एक्ट (IT Act) और धार्मिक/सांस्कृतिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने वाली धाराओं के तहत देखा जा रहा है। पुलिस साइबर सेल की मदद से वेबसाइट के आईपी एड्रेस और संचालकों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
यह मामला पूर्वोत्तर भारत में जनजातीय संस्कृतियों के डिजिटल संरक्षण और उनके सम्मान की रक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है। दुलाराई बोरो हरिमु अफाद ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी पहचान के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। स्थानीय निवासियों और सांस्कृतिक प्रेमियों ने भी इस कदम का पुरजोर समर्थन किया है।
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