IIT Guwahati ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन 50% बढ़ाने वाली कोटिंग तकनीक की विकसित
ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन 50% बढ़ाने
Guwahati: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक नई कोटिंग टेक्नोलॉजी विकसित की है, जो सौर-ऊर्जा से चलने वाले ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन सिस्टम की क्षमता और टिकाऊपन को काफी हद तक बेहतर बना सकती है — यह एक ऐसी बड़ी सफलता है जो भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में मददगार साबित हो सकती है।
यह शोध, जो अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'स्मॉल' में प्रकाशित हुआ है, IIT गुवाहाटी के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. उत्तम मन्ना और प्रो. मोहम्मद कुरैशी के नेतृत्व में किया गया। इस टीम में हृषिकेश शर्मा और शोधार्थी अल्पना साहू, अंशिका चौधरी, सुमंत सरकार, सौरव मंडल और लिंगराज साहू भी शामिल थे।
ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के सबसे स्वच्छ ईंधनों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसे सूर्य की रोशनी का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़कर बनाया जाता है, और इस प्रक्रिया में कोई भी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित नहीं होती है। हालाँकि, मौजूदा सौर-संचालित जल-विभाजन (water-splitting) प्रणालियों को कई बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी दीर्घकालिक क्षमता कम हो जाती है।
एक मुख्य समस्या यह है कि इलेक्ट्रोड पर चढ़ाई गई उत्प्रेरक (catalyst) की परतें समय के साथ धीरे-धीरे उखड़ने लगती हैं, जिससे सिस्टम का टिकाऊपन कम हो जाता है। एक और चुनौती यह है कि रासायनिक अभिक्रिया के दौरान गैस के बुलबुले इलेक्ट्रोड की सतह पर चिपक जाते हैं, जिससे सक्रिय स्थल (active sites) अवरुद्ध हो जाते हैं और हाइड्रोजन उत्पादन की गति धीमी पड़ जाती है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए, IIT गुवाहाटी की टीम ने एक विशेष मिश्रित कोटिंग (composite coating) तैयार की है। यह कोटिंग न केवल उत्प्रेरक की परत को सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि इलेक्ट्रोड की सतह से गैस के बुलबुलों को दूर हटाने का काम भी करती है।