शिमला। देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और कथित वोट चोरी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है, तो मुख्यमंत्री सुक्खू को ईवीएम के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस उसी चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठा रही है, जिसके माध्यम से वह हिमाचल प्रदेश में सत्ता में आई थी।
रविवार, 1 नवंबर को शिमला में भारतीय जनता पार्टी की ओर से आयोजित पदयात्रा और जनसभा के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस की चुनाव संबंधी शिकायतों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर आरोप लगा रहा है, लेकिन जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां भी इसी चुनावी प्रणाली के तहत चुनाव हुए हैं। सरमा के मुताबिक, कांग्रेस को अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव परिणाम अपने पक्ष में आने पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को स्वीकार करती है, लेकिन हार मिलने पर निर्वाचन आयोग और चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है। सरमा ने हिमाचल प्रदेश के साथ कर्नाटक और तेलंगाना का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में कांग्रेस ने इसी चुनाव प्रणाली के माध्यम से सत्ता हासिल की है। उन्होंने कांग्रेस से चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
असम के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि यदि विपक्ष को ईवीएम पर भरोसा नहीं है, तो राहुल गांधी अपनी रायबरेली लोकसभा सीट से मिली जीत को किस नजरिए से देखते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को चुनावी प्रक्रिया पर लगाए जा रहे आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए। सरमा ने मतपत्र से हुए विभिन्न चुनावों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कांग्रेस को उनमें भी हार का सामना करना पड़ा है।
शिमला में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा पुराने बस स्टैंड के पास गुरुद्वारा साहिब पार्किंग से शुरू हुई। इसके बाद भाजपा नेता और कार्यकर्ता विक्ट्री टनल तथा विधानसभा मार्ग से होते हुए चौड़ा मैदान पहुंचे, जहां जनसभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में हिमाचल भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, सांसद अनुराग ठाकुर और सुरेश कश्यप सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
जनसभा में हिमंत बिस्वा सरमा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना आवश्यक है। उनके अनुसार, प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान नियमानुसार की जानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर इस प्रक्रिया को लेकर लोगों में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी रैली में भाग लेने की घोषणा की थी। उन्होंने मतदान के अधिकार की सुरक्षा और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई थी। विपक्ष ईवीएम के स्थान पर मतपत्रों से मतदान कराने की मांग भी उठा रहा है। हालांकि, चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
हिमंत बिस्वा सरमा ने हिमाचल प्रदेश सरकार को रोजगार के मुद्दे पर भी घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान युवाओं को पांच लाख रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन सरकार अपेक्षाओं के अनुरूप रोजगार उपलब्ध नहीं करा सकी। सरमा ने दावा किया कि असम में भाजपा सरकार ने एक लाख सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य रखा था और अब तक लगभग 1.07 लाख युवाओं को नौकरियां उपलब्ध कराई गई हैं। ये आंकड़े उनके राजनीतिक संबोधन में किए गए दावे हैं।
महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के मुद्दे पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री सुक्खू से जवाब मांगा। सरमा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये देने का वादा किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इस योजना के अंतर्गत अब तक कितनी महिलाओं को लाभ मिला है। इसके साथ ही उन्होंने असम में महिलाओं के लिए संचालित आर्थिक सहायता योजनाओं का उल्लेख किया।
भाजपा की पदयात्रा के दौरान सरमा ने वर्ष 2027 में होने वाले हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार बनाएगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों में जुटने और जनता के बीच कांग्रेस सरकार के कामकाज तथा चुनावी वादों को लेकर सवाल उठाने का आह्वान किया। हालांकि, यह उनका राजनीतिक दावा है और चुनाव परिणाम मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेंगे।
इस बीच ईवीएम और मतदाता सूची को लेकर भाजपा तथा कांग्रेस के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। भाजपा जहां चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष के आरोपों का विरोध कर रही है, वहीं कांग्रेस चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठा रही है।
फिलहाल शिमला में हिमंत बिस्वा सरमा के बयान के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस के रुख पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं। ईवीएम, एसआईआर, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दे हिमाचल प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए हैं।