गुवाहाटी। सेना के पूर्व प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी (सेवानिवृत्त) ने शुक्रवार को ‘नमामि भारतम्’ नाम के भव्य सामूहिक गायन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। विद्या भारती नॉर्थ-ईस्ट रीजन की देखरेख में श्रीमंत शंकरदेव इंटरनेशनल ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के महत्व, विकसित भारत के लक्ष्य और युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण पर अपने विचार रखे।कार्यक्रम में जनरल द्विवेदी ने सेना के पूर्व प्रमुख की भूमिका के बजाय सरस्वती शिशु मंदिर के पूर्व छात्र के रूप में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नॉर्थ-ईस्ट को देश के अंतिम छोर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक पूर्वोत्तर वह क्षेत्र है जहां से भारत की शुरुआत होती है और यह देश का वास्तविक प्रवेश द्वार है।
जनरल द्विवेदी ने कहा, “नॉर्थ-ईस्ट वह जगह नहीं है जहां भारत खत्म होता है, बल्कि वह जगह है जहां से भारत शुरू होता है। यह देश का असली प्रवेश द्वार है।” उनके इस वक्तव्य के केंद्र में पूर्वोत्तर की भौगोलिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक भूमिका रही।उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं को संबोधित करते हुए 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का भी जिक्र किया। जनरल द्विवेदी ने ‘वंदे मातरम’ को विकसित भारत की यात्रा के प्रमुख प्रेरक संदेश के रूप में अपनाने की बात कही। उन्होंने युवाओं से कहा कि आने वाले वर्षों में देश की दिशा तय करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
अपने संबोधन में पूर्व सेना प्रमुख ने युवाओं को सफलता और नेतृत्व के लिए तीन मूल मंत्र भी दिए। उन्होंने इन्हें Attitude, Adaptability और Ability यानी नजरिया, परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता और काबिलियत के रूप में समझाया। उन्होंने युवाओं से इन तीनों गुणों को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।जनरल द्विवेदी के मुताबिक किसी व्यक्ति के पास ज्ञान और कौशल होना जरूरी है, लेकिन बदलते समय में सही नजरिया और नई परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। तेजी से बदलती तकनीक, रोजगार के नए स्वरूप और वैश्विक परिस्थितियों के बीच युवाओं को लगातार सीखने और अपनी क्षमताओं को बेहतर करने की जरूरत है।
उन्होंने Attitude यानी नजरिए को जीवन में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनका संदेश था कि चुनौतियों के प्रति सकारात्मक और समाधान केंद्रित दृष्टिकोण व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने में मदद करता है। इसी तरह Adaptability का मतलब बदलती परिस्थितियों को समझना और उसके अनुसार स्वयं को तैयार करना है।तीसरा स्तंभ Ability यानी क्षमता है। उन्होंने युवाओं से अपनी योग्यता और कौशल को लगातार बेहतर बनाने का आह्वान किया। उनका जोर इस बात पर रहा कि विकसित भारत की यात्रा केवल नीतियों या योजनाओं से पूरी नहीं होगी, बल्कि देश के युवाओं की क्षमता और उनकी सक्रिय भागीदारी भी इसमें अहम भूमिका निभाएगी।
‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम का स्वरूप सामूहिक गायन और राष्ट्र से जुड़े सांस्कृतिक संदेशों पर केंद्रित रहा। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता से जुड़े गीत प्रस्तुत किए गए।कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का भी विशेष उल्लेख हुआ। जनरल द्विवेदी ने इसे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के संदर्भ में प्रेरणादायी नारे के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही। उनका कहना था कि ऐसे राष्ट्रीय प्रतीक लोगों को साझा उद्देश्य से जोड़ने में भूमिका निभा सकते हैं।
भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह वर्ष देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक होगा। इसी संदर्भ में अलग-अलग मंचों पर युवाओं, शिक्षा, तकनीक, कौशल, बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास की भूमिका पर चर्चा होती रही है।जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन में पूर्वोत्तर क्षेत्र के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया। भारत का पूर्वोत्तर कई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा है और दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व एशिया की दिशा में देश के संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति रखता है। यही कारण है कि क्षेत्र की कनेक्टिविटी और विकास को लंबे समय से रणनीतिक महत्व दिया जाता रहा है।
उन्होंने युवाओं के सामने पूर्वोत्तर की पहचान को केवल भौगोलिक दूरी के नजरिए से देखने के बजाय देश के प्रवेश द्वार के रूप में प्रस्तुत किया। उनका संदेश था कि नॉर्थ-ईस्ट भारत की विविधता और राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।सरस्वती शिशु मंदिर के पूर्व छात्र होने का उल्लेख करते हुए जनरल द्विवेदी ने अपने छात्र जीवन से जुड़ाव भी जाहिर किया। कार्यक्रम का आयोजन विद्या भारती नॉर्थ-ईस्ट रीजन की देखरेख में किया गया था, इसलिए उनका यह व्यक्तिगत जुड़ाव भी कार्यक्रम के दौरान चर्चा का विषय रहा।
युवाओं को दिए गए उनके तीन सूत्र—Attitude, Adaptability और Ability—कार्यक्रम के प्रमुख संदेशों में शामिल रहे। उन्होंने इन्हें केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखते हुए राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा।बदलते वैश्विक माहौल में नई तकनीक और कौशल का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में अनुकूलन की क्षमता को उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उनका संदेश था कि युवा अपनी मूल क्षमताओं को मजबूत करने के साथ बदलावों को स्वीकार करने और उनसे सीखने की आदत विकसित करें।
‘नमामि भारतम्’ के मंच से जनरल उपेंद्र द्विवेदी का संबोधन मुख्य रूप से युवाओं, राष्ट्रीय एकता और पूर्वोत्तर भारत की भूमिका पर केंद्रित रहा। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य के लिए नई पीढ़ी की भागीदारी पर जोर दिया और युवाओं से अपने जीवन में सही नजरिया, बदलाव के अनुरूप ढलने की क्षमता और काबिलियत विकसित करने का आह्वान किया।कार्यक्रम के दौरान पूर्वोत्तर को लेकर दिया गया उनका संदेश भी प्रमुख रहा। “भारत यहां खत्म नहीं होता, बल्कि यहां से शुरू होता है” कहते हुए उन्होंने क्षेत्र को देश का वास्तविक प्रवेश द्वार बताया। साथ ही 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को सामने रखते हुए युवाओं से अपनी क्षमताओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में इस्तेमाल करने का संदेश दिया।
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