गुवाहाटी: असम सरकार ने छात्रों को प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से नामेरी टाइगर रिजर्व में 'नामेरी वाइल्ड क्लासरूम' पहल शुरू की है। राज्य के पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने 10 अक्टूबर 2026 को इस कार्यक्रम की घोषणा की। इसके तहत आठवीं कक्षा और उससे ऊपर के स्कूली छात्रों के साथ कॉलेज के विद्यार्थियों को भी जंगल में रहकर पर्यावरण और वन्यजीवों के बारे में सीखने का अवसर मिलेगा।
जंगल में लगेगी छात्रों की अनोखी क्लास
'नामेरी वाइल्ड क्लासरूम' का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबों और पारंपरिक कक्षाओं से बाहर निकालकर प्रकृति के बीच व्यावहारिक शिक्षा देना है। इस पहल में छात्र जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र, वन्यजीवों के व्यवहार और जैव विविधता को करीब से समझ सकेंगे। उन्हें वन संरक्षण के महत्व और प्राकृतिक संसाधनों की भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी।
दो और तीन दिन के आवासीय कार्यक्रम

वन विभाग ने इस पहल के अंतर्गत दो और तीन दिन के आवासीय कार्यक्रमों की व्यवस्था की है। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को नामेरी टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक वातावरण में रहने और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा। आठवीं कक्षा से लेकर कॉलेज स्तर तक के विद्यार्थी इसमें शामिल हो सकेंगे। शिक्षण संस्थानों और शिक्षकों को भी छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
पक्षियों की पहचान से लेकर जंगल की सैर तक
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पक्षियों को देखने और उनकी पहचान करने की गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा जंगल की सैर, वन्यजीवों के पैरों के निशान पहचानना और उनके प्राकृतिक आवास के बारे में जानकारी प्राप्त करना भी कार्यक्रम का हिस्सा होगा। विशेषज्ञ छात्रों को बताएंगे कि जंगल में जानवरों की मौजूदगी के संकेत कैसे पहचाने जाते हैं और विभिन्न जीवों की पारिस्थितिकी तंत्र में क्या भूमिका होती है। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण का व्यावहारिक अनुभव देना है।
जिया-भराली नदी में राफ्टिंग का अनुभव
'नामेरी वाइल्ड क्लासरूम' के तहत छात्रों को जिया-भराली नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में नदी से जुड़ी गतिविधियों और राफ्टिंग को शामिल किया गया है। इस दौरान विद्यार्थियों को जलीय जीवों, नदी के आसपास के प्राकृतिक आवास और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा। छात्र स्थानीय समुदायों की परंपराओं और प्रकृति के साथ उनके संबंधों के बारे में भी जान सकेंगे।
छात्रों को मिलेगा प्रमाणपत्र
कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को अपने अनुभव और अवलोकन दर्ज करने के लिए फील्ड जर्नल तैयार करना होगा। इसमें छात्र जंगल की गतिविधियों, देखे गए पक्षियों, वन्यजीवों और पर्यावरण से संबंधित जानकारियों को लिख सकेंगे। कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रतिभागियों को असम वन विभाग की ओर से प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने स्कूलों, कॉलेजों और शिक्षकों से इस पहल में विद्यार्थियों को शामिल करने की अपील की है।
वन्यजीव संरक्षण के प्रति बढ़ेगी जागरूकता
असम के सोनितपुर जिले में स्थित नामेरी टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां बाघ, हाथी, तेंदुए और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों सहित अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं। राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य युवाओं को प्राकृतिक विरासत से जोड़ना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी समझ विकसित करना है।
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