ASSAM  असम : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है, जिनमें म्यांमार स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन उल्फा-आई का एक कैडर भी शामिल है, जो भारत विरोधी एजेंडे के तहत असम में सेना के शिविरों को निशाना बनाने की साजिश में शामिल था।
एनआईए की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि प्रतिबंधित संगठन के दो मोटरसाइकिल सवार कैडरों ने पिछले साल 14 दिसंबर को जोरहाट जिले के लिचुबारी में सैन्य स्टेशन पर ग्रेनेड फेंके थे, जो पूरे पूर्वोत्तर राज्य में सेना के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था।
इसमें कहा गया है कि यह घटना असम के तिनसुकिया जिले के काकोपाथर में सेना के शिविर पर इसी तरह के हमले के एक महीने से भी कम समय बाद हुई।
यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट या उल्फा-आई ने 15 दिसंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर हमलों की जिम्मेदारी ली थी।
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एनआईए ने कहा कि दोनों हमलों की पूरी साजिश म्यांमार में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से उल्फा-आई के स्वयंभू (एसएस) कैप्टन अभिजीत गोगोई उर्फ ​​कनक गोगोई उर्फ ​​रुमेल असोम उर्फ ​​ऐचेंग असोम उर्फ ​​ऐशांग असोम और उल्फा-आई प्रमुख परेश बरुआ उर्फ ​​परेश असोम द्वारा रची गई थी।
इन हमलों के पीछे एक अन्य प्रमुख साजिशकर्ता की पहचान संगठन के एसएस ब्रिगेडियर अरुणोदय दोहुतिया उर्फ ​​अरुणोदय असोम के रूप में की गई है।
जोरहाट मामले में एनआईए की जांच में बिप्लब बरुआ, बिराज कचारी और अच्युत गोगोई नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
इन तीनों के खिलाफ मंगलवार को गुवाहाटी की एक विशेष एनआईए अदालत में एसएस कैप्टन ऐचेंग असोम के साथ आरोप पत्र दाखिल किया गया, जो अभी भी फरार है।
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