डूमडूमा: असम के तिनसुकिया जिला प्रशासन ने सादिया सब-डिवीजन में कई पाबंदियां लगाई हैं। ऐसा तब किया गया जब साइखोवा के खुटीपाथर गांव को 'अफ्रीकन स्वाइन फीवर' (ASF) का केंद्र (एपिसेंटर) घोषित किया गया। प्रशासन ने सूअर के मांस की बिक्री और सूअरों तथा उनसे बने उत्पादों की आवाजाही पर 30 दिनों के लिए रोक लगा दी है।
जिला आयुक्त सुमित सट्टावन ने इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए 'आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005' (Disaster Management Act, 2005) के प्रावधानों को लागू किया है।
प्रशासन ने खुटीपाथर के आसपास के एक किलोमीटर के दायरे को 'संक्रमित क्षेत्र' (infected zone) और 10 किलोमीटर के दायरे को 'निगरानी क्षेत्र' (surveillance zone) घोषित किया है।
राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत, पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की देखरेख में, संक्रमित क्षेत्र में 14, 15 और 16 अक्टूबर को सूअरों को मारने (culling) का अभियान तय किया गया था।
इस अभियान और उसके बाद की साफ-सफाई (सैनिटेशन) की कार्यवाही का पूरा रिकॉर्ड रखा जाना है।
सादिया सब-डिवीजन में सूअर के मांस से जुड़े उत्पादों को बेचने वाली सभी दुकानों को 30 दिनों तक, या अगले आदेश तक, बंद रखने का निर्देश दिया गया है।
अन्य जिलों और पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश से सूअरों और सूअर के मांस से जुड़े उत्पादों के आने-जाने पर भी रोक लगा दी गई है।
इस पाबंदी के दौरान, सब-डिवीजन के बाजारों और दुकानों में सूअर के मांस की बिक्री पर रोक रहेगी।
आदेश में चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने पर 'भारतीय न्याय संहिता' की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।