असम: ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) ने असम विधानसभा भवन से बोडो भाषा के डिस्प्ले को हटाए जाने की खबरों पर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस मुद्दे से एक अलग 'बोडोलैंड' राज्य की मांग फिर से उठ सकती है।
एक बयान में, ABSU के अध्यक्ष क्वरमदाओ वारी ने नेमप्लेट हटाए जाने की घटना को भाषाई गरिमा, संवैधानिक मान्यता और बोडो समुदाय के ऐतिहासिक संघर्ष से जुड़ा मामला बताया।
वारी ने कहा कि बोडो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के बावजूद, इस कदम को समुदाय अपनी पहचान और मान्यता को नकारने के रूप में देख सकता है।
उन्होंने कहा कि बोडो आंदोलन ने लंबे समय से अपने समुदाय और भाषा के लिए गरिमा, पहचान, मान्यता और समान व्यवहार की मांग की है। उनके अनुसार, यह घटना सवाल खड़े करती है कि क्या संवैधानिक मान्यता वास्तव में समान सम्मान और व्यवहार के रूप में दिखाई दे रही है।
ABSU अध्यक्ष का तर्क है कि यह मुद्दा केवल प्रशासनिक साइनबोर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि असम की राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान में बोडो समुदाय के स्थान से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं ऐतिहासिक उपेक्षा की यादों को ताजा कर सकती हैं और भाषाई भेदभाव को लेकर चिंताएं बढ़ा सकती हैं।
वारी ने यह भी चेतावनी दी कि इस विवाद के व्यापक कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक परिणाम हो सकते हैं। इससे समुदाय के भीतर अलगाव की भावना बढ़ सकती है और अधिक स्वायत्तता की मांग और मजबूत हो सकती है।
भारत में भाषाई पहचान और राजनीतिक आकांक्षाओं के बीच संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे ने बोडो लोगों के भविष्य और उनकी सांस्कृतिक व साहित्यिक विरासत की सुरक्षा पर चर्चा की जरूरत को फिर से सामने ला दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि समुदाय की गरिमा, मान्यता और भाषाई व सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए एक अलग 'बोडोलैंड' राज्य की मांग फिर से उठ सकती है। वारी ने कहा कि अगर इन चिंताओं का समाधान नहीं किया गया, तो उनका संगठन असम के भीतर बोडो लोगों के बने रहने पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर हो सकता है।
यह जोर देते हुए कि यह विवाद सिर्फ एक नेमप्लेट से कहीं बढ़कर है, वारी ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि संवैधानिक वादों को असल जिंदगी में लागू करने और न्याय व समानता के लिए बोडो समुदाय के ऐतिहासिक संघर्ष को मान्यता देने की जरूरत है।
बोडो भाषा के डिस्प्ले को हटाए जाने की खबर और इस फैसले से जुड़ी परिस्थितियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।