गुवाहाटी: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को कहा कि राज्य में निवेश के सबसे बड़े मौकों में से एक हाइड्रोपावर (जलविद्युत) है, जिसके तहत लगभग 19,000 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाएं विकास के अलग-अलग चरणों में हैं।
पासीघाट में एक आधिकारिक कार्यक्रम में बोलते हुए, खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश को हाइड्रोपावर परियोजनाओं से 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली मिलती रहेगी, जबकि केंद्र सरकार राज्य के लिए 26 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी की सुविधा देने पर सहमत हो गई है।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं में राज्य का इक्विटी योगदान लगभग 15,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है और केंद्र सरकार इसके लिए फंडिंग में मदद करने पर भी सहमत हो गई है।
खांडू ने कहा कि 2,000 मेगावाट की लोअर सुबनसिरी परियोजना के अगले साल पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है, जिससे राज्य को मुफ्त बिजली और इक्विटी से जुड़ी कमाई, दोनों मिलेंगी।
उन्होंने कहा कि अरुणाचल का बजट 2015 में लगभग 12,500 करोड़ रुपये से बढ़कर अब लगभग 40,000 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि ज़्यादा निवेश और राज्य के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल अर्थव्यवस्था को और मज़बूत करेगा।
‘SUMP सिर्फ़ एक पावर प्रोजेक्ट नहीं है’
सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट (SUMP) पर चल रहे विवाद के बारे में खांडू ने कहा कि सबसे पहला कदम 'प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट' (PFR) तैयार करना है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि तय तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने से पहले निर्माण के बारे में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि SUMP को सिर्फ़ एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका बड़ा मकसद पानी के बहाव को मैनेज करने और पानी से जुड़े संभावित खतरों को कम करने के लिए एक सिस्टम बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि PFR के बाद विस्तृत अध्ययन और कानूनी प्रक्रियाएं होंगी, जिनमें 'सामाजिक प्रभाव आकलन' और 'पर्यावरण प्रभाव आकलन' के साथ-साथ लोगों से बातचीत भी शामिल होगी।
खांडू ने कहा, "जब तक हम संतुष्ट नहीं हो जाते, तब तक यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सकता।" उन्होंने ज़ोर दिया कि प्रभावित इलाकों के लोगों को विशेषज्ञों से सवाल पूछने, अपनी चिंताएं ज़ाहिर करने और जवाब पाने का मौका मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी दफ़्तर इस प्रोजेक्ट पर बातचीत और चर्चा के लिए खुले रहेंगे और प्रतिनिधियों को प्रेजेंटेशन देने और स्पष्टीकरण मांगने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि सरकार सोशल मीडिया के ज़रिए 'आदि' भाषा में SUMP के बारे में जानकारी फैलाने की भी कोशिश करेगी।
खांडू ने SUMP को रणनीतिक महत्व वाला एक राष्ट्रीय प्रोजेक्ट बताया और अरुणाचल प्रदेश की भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास स्थित होने की बात पर ज़ोर दिया।
उन्होंने ऊपरी इलाकों से पानी का रुख मोड़ने और अचानक पानी छोड़े जाने की संभावनाओं पर भी चिंता जताई, साथ ही सियांग इलाके में बार-बार आने वाली बाढ़ के लिए लंबे समय तक चलने वाले समाधान की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञों को फिज़िबिलिटी (संभाव्यता) और उसके बाद की असेसमेंट (मूल्यांकन) प्रक्रियाओं के दौरान इन मुद्दों की जांच करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभी ध्यान PFR पर होना चाहिए, न कि बांध बनाने के किसी ऐसे फ़ैसले पर जिसे बदला न जा सके। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को तकनीकी प्रक्रिया से तथ्य सामने आने देने चाहिए और उसके बाद कानूनी रूप से ज़रूरी बातचीत और फ़ैसला लेने की प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए।
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