अरुणाचल: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के विशेष मॉनिटर प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने बुधवार, 21 अक्टूबर को ईटानगर स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर 2 का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों और स्कूल के अधिकारियों के साथ मानवाधिकार शिक्षा, लैंगिक समानता और एक समावेशी शिक्षण माहौल बनाने के महत्व पर चर्चा की।
इस कार्यक्रम में SCERT, ईटानगर के सहायक निदेशक एस. बी. सिंह; समर बहादुर; अरुणाचल प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के उप-पंजीयक मामा तांग; प्रधानाचार्य विनय कुमार; शिक्षक, स्टाफ सदस्य और छात्र शामिल हुए।
प्रो. त्रिपाठी का स्वागत करते हुए, प्रधानाचार्य विनय कुमार ने मानवाधिकार जागरूकता, लैंगिक संवेदनशीलता और समान अवसर को बढ़ावा देने के लिए स्कूल द्वारा की गई पहलों के बारे में बताया। उन्होंने मॉर्निंग असेंबली, वाद-विवाद, तात्कालिक भाषण (extempore), 'यूथ पार्लियामेंट' (युवा संसद) और पीएम श्री योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों का जिक्र किया। ये गतिविधियां छात्रों में दूसरों के प्रति सम्मान, सहानुभूति, लोकतांत्रिक भागीदारी और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित करती हैं।
प्रधानाचार्य ने 'यूथ पार्लियामेंट', 'नेशनल चिल्ड्रेन्स साइंस कांग्रेस' (NCSC) और 'राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी' (RBVP) जैसी पहलों के शैक्षिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये मंच छात्रों को कक्षा की पढ़ाई से इतर कौशल विकसित करने में मदद करते हैं।
'यूथ पार्लियामेंट' छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक मूल्यों से परिचित कराती है, साथ ही उनके शोध, आलोचनात्मक सोच, सार्वजनिक रूप से बोलने (public speaking) और टीम वर्क के कौशल को मजबूत करती है। यह छात्रों को अलग-अलग विचारों को सुनने और सम्मानपूर्वक चर्चा में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित करती है।
इसी तरह, NCSC और RBVP छात्रों को समस्याओं की जांच करने, प्रयोग करने, साक्ष्यों का उपयोग करने और व्यावहारिक समाधान खोजने के अवसर प्रदान करते हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, सहयोग और पर्यावरणीय तथा सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है।
स्कूल विज्ञान और गणित से जुड़ी गतिविधियां, विशेषज्ञों के साथ संवाद और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) तथा नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NERIST) जैसे संस्थानों में शैक्षिक दौरे भी आयोजित करता है। 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' (EBSB), 'प्रयास' (PRAYAAS) और 'प्रेरणा' (PRERNA) के तहत होने वाली गतिविधियां भी छात्रों के सीखने और विकास में योगदान देती हैं।
समान पहुंच और समान अवसरों पर जोर देते हुए, प्रधानाचार्य विनय कुमार ने दिव्यांग छात्रों और छात्राओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं का भी उल्लेख किया। इनमें ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल को जोड़ने वाला एक रैंप, तथा दिव्यांग छात्रों, लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग वॉशरूम शामिल हैं।
बातचीत के दौरान, प्रो. त्रिपाठी ने मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता और जेंडर संवेदनशीलता को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने ऐसे नागरिकों को तैयार करने की बात कही जो समानता और मानवीय गरिमा का सम्मान करते हों।
समर बहादुर ने ईटानगर राजधानी क्षेत्र में छात्रों, परिवारों और समुदायों को शामिल करके, कक्षा के दायरे से बाहर भी जागरूकता फैलाने में स्कूल की भूमिका पर प्रकाश डाला।
यह कार्यक्रम 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के उद्देश्यों के अनुरूप, मानवाधिकार शिक्षा और लैंगिक समानता को स्कूल की रोजमर्रा की गतिविधियों में शामिल करने पर केंद्रित था। साथ ही, इसका उद्देश्य छात्रों को एक सुरक्षित, समावेशी और समान सीखने का माहौल प्रदान करने के प्रयासों को मजबूत करना था।