नई दिल्ली: जैव विविधता को बचाने और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल के तहत NMHS (नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज) वाइल्ड पॉलिनेटर प्रोजेक्ट को नई गति मिलने जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य जंगली परागणकर्ताओं (Wild Pollinators) का संरक्षण करना और उनके महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
परागणकर्ता जैसे मधुमक्खियां, तितलियां, पतंगे और अन्य कीट वनस्पतियों के प्रजनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके संरक्षण से जंगलों, कृषि और प्राकृतिक संसाधनों की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
वाइल्ड पॉलिनेटर्स के संरक्षण पर फोकस
परियोजना के तहत हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले जंगली परागणकर्ताओं की पहचान, अध्ययन और संरक्षण के लिए काम किया जाएगा। वैज्ञानिक इनकी आबादी, आवास और पर्यावरणीय बदलावों के प्रभावों का अध्ययन करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और आवासों के खत्म होने से कई परागणकर्ता प्रजातियों पर खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में उनका संरक्षण जैव विविधता के लिए बेहद जरूरी है।
कृषि और पर्यावरण के लिए अहम भूमिका
वाइल्ड पॉलिनेटर्स खेती और खाद्य सुरक्षा में भी अहम योगदान देते हैं। कई फसलों के उत्पादन में प्राकृतिक परागण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके संरक्षण से किसानों और पर्यावरण दोनों को लाभ मिल सकता है।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी
परियोजना में स्थानीय समुदायों को भी जोड़ने की योजना है, ताकि संरक्षण के प्रयासों को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाया जा सके। लोगों को परागणकर्ताओं के महत्व और उनके संरक्षण के तरीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
जैव विविधता संरक्षण की ओर बढ़ता कदम
NMHS वाइल्ड पॉलिनेटर प्रोजेक्ट को मजबूत करना हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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