पूर्वोत्तर में बाल संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती, आयोगों ने बढ़ाया आपसी सहयोग
आयोगों ने संरक्षण व्यवस्था मजबूत करने का लिया फैसला
तवांग: पूर्वोत्तर राज्यों के बाल अधिकार संरक्षण आयोगों का दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन शनिवार को यहां संपन्न हुआ। इसमें सभी संबंधित पक्षों के बीच लगातार सहयोग और तालमेल के साथ काम करके हर बच्चे की सुरक्षा, देखभाल, शिक्षा और समग्र भलाई को और मजबूत करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
इस सम्मेलन में क्षेत्रीय सहयोग, जानकारी साझा करने और मिलकर काम करने के माध्यम से बाल अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करने के विषय पर चर्चा की गई।
समापन सत्र में राज्य आयोगों के अध्यक्षों और प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने अपने-अपने राज्यों में बाल सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए अपने अनुभव, बेहतरीन कार्यप्रणालियों, नई पहलों और सुझावों को साझा किया।
चर्चाओं में बच्चों को प्रभावित करने वाली नई चुनौतियों से निपटने के लिए अंतर-राज्य सहयोग, संस्थागत तालमेल, सामुदायिक भागीदारी और सफल मॉडलों के आदान-प्रदान के महत्व पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन के नतीजे भविष्य में बाल अधिकारों से जुड़ी पहलों के लिए एक मानक (बेंचमार्क) का काम करेंगे और देश भर में इसी तरह के सहयोगी प्रयासों को प्रेरित करेंगे।
कानूनगो ने बाल कल्याण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सभी पूर्वोत्तर राज्यों को एक साझा मंच पर लाने की पहल की सराहना की। उन्होंने सम्मेलन से निकली सिफारिशों और चर्चाओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इनसे बाल अधिकार नीतियों को आकार देने और संस्थागत तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने भरोसा जताया कि इन सामूहिक प्रयासों से लाभान्वित होने वाले बच्चे जिम्मेदार और सशक्त नागरिक बनेंगे तथा 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अरुणाचल प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में पूर्वोत्तर राज्यों के बाल अधिकार संरक्षण आयोगों के अध्यक्ष, सदस्य और अधिकारी शामिल हुए। (DIPRO)