डिब्रूगढ़: चांगलांग ज़िले के पांगसाऊ दर्रे (Pangsau Pass) पर भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का रणनीतिक प्रोजेक्ट, कड़ी सुरक्षा के बीच जारी है। हाल ही में उग्रवादियों के हमले में असम राइफल्स के जवान शहीद हुए थे, फिर भी काम जारी है। काम का जारी रहना यह दिखाता है कि केंद्र सरकार उग्रवाद से प्रभावित इस इलाके में सीमा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए कितनी गंभीर है।
बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन (BRO) अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने का काम कर रहा है। निर्माण कार्य में लगे लोगों, मशीनों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। हमले के बाद सुरक्षा इंतज़ाम और कड़े कर दिए गए हैं, और निर्माण टीमें हमले वाली जगह से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए काम कर रही हैं।
नवंबर 2025 में पांगसाऊ दर्रे पर शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट, केंद्र सरकार की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाई जाएगी। इस पहल का मकसद उग्रवाद को रोकना, सीमा पार से होने वाली गैर-कानूनी आवाजाही पर रोक लगाना और पूरे पूर्वोत्तर में सुरक्षा को बेहतर बनाना है।
केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 31,000 करोड़ रुपये मंज़ूर किए हैं। यह प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिज़ोरम और नागालैंड तक फैला है। अरुणाचल प्रदेश की सीमा सबसे लंबी है (520 किलोमीटर), इसके बाद मिज़ोरम (510 किलोमीटर), मणिपुर (398 किलोमीटर) और नागालैंड (215 किलोमीटर) का नंबर आता है।
यह बाड़ अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग (TCL) इलाके के लिए बहुत अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहाँ दशकों से उग्रवादी गतिविधियाँ और जबरन वसूली की समस्या रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना ​​है कि आसानी से पार की जा सकने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हथियारबंद उग्रवादियों की आवाजाही रोकने से उनके सप्लाई रूट बाधित हो सकते हैं और उनकी ऑपरेशनल क्षमता कमज़ोर हो सकती है।
इस प्रोजेक्ट से ड्रग्स की तस्करी और सीमा पार से होने वाली दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट इलाके में सुरक्षा बेहतर बनाने और स्थायी शांति लाने के केंद्र सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
चांगलांग और अरुणाचल प्रदेश के दूसरे हिस्सों के लोगों ने इस पहल का समर्थन किया है, और राज्य सरकार ने भी केंद्र सरकार के इस प्रोजेक्ट का साथ दिया है। यह काम ऐसे समय में हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित करने और सीमावर्ती समुदायों के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नए सिरे से प्रयास किए जा रहे हैं। मार्च में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि मणिपुर में 30 किलोमीटर की सीमा पर बाड़ लगाने का काम पूरा हो चुका है। उन्होंने म्यांमार से सीमा साझा करने वाले चार पूर्वोत्तर राज्यों में निर्माण कार्य में तेज़ी लाने के केंद्र के प्रयासों पर ज़ोर दिया।
अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व को देखते हुए इसे जल्द से जल्द पूरा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है। मुश्किल इलाक़े, खराब मौसम और सुरक्षा खतरों के बावजूद, पांगसाऊ दर्रे (Pangsau Pass) पर निर्माण कार्य जारी है।
पूरा होने पर, उम्मीद है कि यह बाड़ उग्रवाद को रोकने, नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने और TCL क्षेत्र में लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
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