अमरावती। आंध्र प्रदेश में शराब की बिक्री और कथित अनियमितताओं को लेकर सत्तारूढ़ TDP गठबंधन और विपक्षी YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। YSRCP ST सेल के प्रदेश अध्यक्ष (प्लेन एरिया) गुंडा सुरेंद्र ने शनिवार को आरोप लगाया कि शराब की बिक्री को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाने वाले दो युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उन्होंने मांग की कि पुलिस दोनों युवकों के ठिकाने और उनकी स्थिति के बारे में उनके परिवारों को तत्काल जानकारी दे।YSRCP के केंद्रीय कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए गुंडा सुरेंद्र ने दावा किया कि महेश्वर रेड्डी नाम के युवक ने हैदराबाद में शराब को अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP से ज्यादा कीमत पर बेचे जाने को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इसके बाद उसे कथित तौर पर हिरासत में लिया गया। सुरेंद्र ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी नागरिक द्वारा सोशल मीडिया पर शराब की कीमत को लेकर सवाल उठाना गिरफ्तारी का आधार नहीं बनना चाहिए।
सुरेंद्र ने एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मंगलगिरी के एक आदिवासी युवक को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। उनके मुताबिक, युवक ने आंध्र प्रदेश आबकारी विभाग से जुड़े सुरक्षा ऐप का इस्तेमाल कर कथित नकली या संदिग्ध शराब की पहचान करने का प्रयास किया था और इससे संबंधित जानकारी सामने रखी थी। इसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई किए जाने का आरोप YSRCP नेता ने लगाया।इन दोनों मामलों में YSRCP की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सूचनाओं से नहीं हो सकी है। संबंधित युवकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का कानूनी आधार और पुलिस का विस्तृत पक्ष भी सामने आना बाकी है। इसलिए गिरफ्तारी और कथित उत्पीड़न से जुड़े दावों को फिलहाल पार्टी नेता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गुंडा सुरेंद्र ने विशेष रूप से मंगलगिरी के आदिवासी युवक की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवक के परिवार को उसकी स्थिति और उसे कहां रखा गया है, इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। सुरेंद्र ने चेतावनी दी कि अगर युवक को किसी तरह का नुकसान पहुंचता है तो स्थानीय विधायक और राज्य सरकार में मंत्री नारा लोकेश को जिम्मेदार माना जाएगा। यह YSRCP नेता का राजनीतिक आरोप और चेतावनी है।उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अगर शराब की बिक्री पूरी तरह नियमों के मुताबिक हो रही है तो सोशल मीडिया पर सवाल उठाने वाले लोगों के खिलाफ कथित तौर पर कार्रवाई क्यों की जा रही है। सुरेंद्र ने कहा कि सरकार को सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनकी शिकायतों और दावों की जांच करनी चाहिए।
आंध्र प्रदेश में शराब नीति पिछले कुछ समय से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल रही है। राज्य सरकार ने सितंबर 2026 में वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति जारी की है। आधिकारिक गजट के अनुसार नई नीति 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2027 तक लागू होनी है।नई आबकारी नीति में खुदरा शराब दुकानों के संचालन और नियमों के पालन को लेकर कई प्रावधान किए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य में 3,736 खुदरा शराब दुकानों की व्यवस्था को जारी रखते हुए मौजूदा लाइसेंसधारकों को एक वर्ष के लिए लाइसेंस नवीनीकरण का विकल्प दिया गया। नीति में MRP के पालन, गैर-शुल्क भुगतान वाली या नकली शराब की रोकथाम और ई-इन्वेंट्री जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया है।
ऐसे समय में MRP से अधिक कीमत पर शराब बेचने और संदिग्ध शराब की पहचान से जुड़े YSRCP नेता के आरोप राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गए हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुरेंद्र द्वारा बताए गए दोनों मामलों के सभी तथ्य अभी सार्वजनिक रूप से स्वतंत्र स्रोतों से पुष्ट नहीं हुए हैं।YSRCP पहले भी राज्य की शराब नीति को लेकर TDP गठबंधन सरकार पर सवाल उठाती रही है। इसी महीने पार्टी ने शराब दुकानों के लाइसेंस के ऑटो-रिन्यूअल के फैसले की आलोचना करते हुए दावा किया था कि इससे सरकारी राजस्व को नुकसान हो सकता है। यह दावा विपक्षी पार्टी का है।
दूसरी तरफ TDP गठबंधन सरकार और उसके मंत्रियों की ओर से भी पूर्ववर्ती YSRCP सरकार की शराब नीति और उसके कार्यकाल में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार आरोप लगाए जाते रहे हैं। राज्य के मंत्री के. पार्थसारथी ने हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी और उनकी सरकार पर शराब से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाए थे। इस तरह शराब का मुद्दा दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का विषय बना हुआ है।गुंडा सुरेंद्र इससे पहले भी आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर गठबंधन सरकार की आलोचना करते रहे हैं। अगस्त में उन्होंने विशाखापत्तनम के मारिकावलसा क्षेत्र में आदिवासी छात्रों से जुड़े एक मामले को उठाते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए थे।
शनिवार को पार्टी कार्यालय में दिए बयान में सुरेंद्र ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को सरकार की नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर शराब बिक्री से जुड़े सवाल उठाने वाले युवकों के खिलाफ कार्रवाई कर लोगों में भय पैदा करने की कोशिश की जा रही है।YSRCP नेता ने पुलिस से मांग की कि दोनों युवकों के बारे में उनके परिवारों को स्पष्ट जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है तो उसके परिवार को इसकी जानकारी और कानूनी प्रक्रिया के बारे में बताया जाना चाहिए।
फिलहाल YSRCP ने पूरे मामले में TDP गठबंधन सरकार को घेरते हुए दोनों युवकों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। दूसरी ओर, पुलिस या सरकार की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवकों के खिलाफ किस आधार पर कार्रवाई की गई और उनके खिलाफ क्या आरोप दर्ज किए गए हैं।शराब नीति को लेकर आंध्र प्रदेश में पहले से चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच यह मामला अब एक नया मुद्दा बन गया है। YSRCP ने इसे नागरिकों की आवाज दबाने से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है, जबकि मामले से जुड़े पुलिस रिकॉर्ड और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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