अमरावती। युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने आंध्र प्रदेश की TDP नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के खिलाफ चीनी मिलों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने साफ कहा है कि वह राज्य की सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों को बेचने या निजीकरण की अनुमति नहीं देगी। इसके साथ ही YSRCP ने गोवाड़ा फैक्ट्री से जुड़े किसानों और कर्मचारियों के बकाया भुगतान को जल्द पूरा करने की मांग की है।YSRCP ने एक प्रेस रिलीज जारी कर आरोप लगाया कि सरकार सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों की जमीन से आर्थिक लाभ हासिल करने की योजना बना रही है। पार्टी ने मांग की कि सरकार को जमीन मॉनेटाइजेशन के फैसले को तुरंत वापस लेना चाहिए।
पार्टी नेताओं ने कहा कि चीनी मिलें किसानों और कर्मचारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं, इसलिए इनके भविष्य को केवल आर्थिक लाभ के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र की इन मिलों से हजारों किसानों और श्रमिकों की आजीविका जुड़ी हुई है।मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ और पूर्व विधायक धर्मश्री ने TDP सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू निजीकरण की नीतियों के लिए जाने जाते हैं और कैबिनेट का हालिया फैसला भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
YSRCP नेताओं ने दावा किया कि राज्यभर में सहकारी चीनी मिलों के पास करीब 770 एकड़ जमीन का बैंक मौजूद है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इसी जमीन से राजस्व जुटाने के उद्देश्य से मॉनेटाइजेशन की योजना बना रही है।पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ ने कहा कि सहकारी संस्थाओं की संपत्तियां किसानों और कर्मचारियों के हितों से जुड़ी होती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इन संपत्तियों को बेचने के बजाय मिलों को मजबूत करने और उन्हें दोबारा सक्रिय करने पर ध्यान देना चाहिए।YSRCP नेताओं ने गोवाड़ा चीनी फैक्ट्री का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री से जुड़े किसानों और कर्मचारियों के भुगतान लंबित हैं और सरकार को सबसे पहले उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।पार्टी ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान मिलना चाहिए। YSRCP ने सरकार से मांग की कि वह सहकारी चीनी मिलों के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाए।
जमीन बेचने की योजना का विरोध
YSRCP ने आरोप लगाया कि सहकारी क्षेत्र की जमीनों को बेचने या उनसे पैसा जुटाने का फैसला लंबे समय में किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।पार्टी नेताओं का कहना है कि चीनी मिलें केवल उद्योग नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके जरिए किसानों, मजदूरों और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है।YSRCP ने सरकार से अपील की कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों को मजबूत करने के लिए कदम उठाए।
TDP सरकार पर लगाए आरोप
YSRCP नेताओं ने कहा कि सरकार को सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता बरतनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनों को मॉनेटाइज करने का फैसला बिना किसानों और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखे लिया गया है।उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं की संपत्तियां किसी एक सरकार की नहीं होतीं, बल्कि उनसे जुड़े लोगों की होती हैं। इसलिए इनके संबंध में कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले सभी पक्षों से बातचीत जरूरी है।
राजनीतिक विवाद तेज
चीनी मिलों और उनकी जमीनों को लेकर आंध्र प्रदेश में राजनीतिक विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। YSRCP ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है और कहा है कि वह किसानों और कर्मचारियों के हितों के लिए संघर्ष करेगी।वहीं, सरकार के फैसले को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। सहकारी संस्थाओं की संपत्तियों के उपयोग और भविष्य को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।YSRCP ने दोहराया कि वह चीनी मिलों की बिक्री या निजीकरण का समर्थन नहीं करेगी। पार्टी ने सरकार से किसानों और कर्मचारियों के बकाया भुगतान को प्राथमिकता देने की मांग की है।कुल मिलाकर, आंध्र प्रदेश में सहकारी चीनी मिलों की जमीन के मॉनेटाइजेशन को लेकर सियासी विवाद शुरू हो गया है। YSRCP ने TDP सरकार के फैसले का विरोध करते हुए इसे वापस लेने और गोवाड़ा फैक्ट्री से जुड़े किसानों व कर्मचारियों का बकाया चुकाने की मांग की है।
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