नई दिल्ली: मंगलवार को जारी सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, केंद्र की नई VB-G RAM G ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना ने इस साल 1 जुलाई को लागू होने के बाद से काफी प्रगति की है। इस योजना के तहत सक्रिय श्रमिकों की संख्या बढ़कर 10.88 करोड़ हो गई है और 31.69 करोड़ से ज़्यादा 'पर्सन-डेज़' (एक व्यक्ति के एक दिन के काम) का रोज़गार पैदा हुआ है (24 सितंबर तक)।
इस योजना में महिलाओं की भागीदारी 61.65 प्रतिशत है और श्रमिकों को मांग के आधार पर रोज़गार दिया जा रहा है।
फैक्टशीट के अनुसार, चल रहे कामों की संख्या 97.17 लाख तक पहुंच गई है और 73.24 लाख लोगों की भविष्य की रोज़गार मांग को पूरा करने के लिए मंज़ूर किए गए काम आसानी से उपलब्ध हैं।
देश भर में लगभग 2.31 लाख ग्राम पंचायतें अभी काम कर रही हैं। इस योजना के तहत प्रति व्यक्ति प्रति दिन औसतन 283.24 रुपये की मज़दूरी दी जा रही है और योजना के पहले तीन महीनों में ही श्रमिकों के खातों में 3.76 करोड़ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) किए जा चुके हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अंतरिम आवंटन के तौर पर कुल 93,841 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। फैक्टशीट में आगे बताया गया है कि इसमें से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पहली किस्त के तौर पर 25,880 करोड़ रुपये की 'मदर सैंक्शन' (मुख्य मंज़ूरी) जारी की गई है।
महात्मा गांधी NREGA से VB-G RAM G में बदलाव बिना किसी रुकावट और परेशानी के हुआ है। बयान में कहा गया है कि नए ढांचे के शुरू होने के साथ ही इसे लागू करने में मदद करने वाले डिजिटल सिस्टम काम करने लगे थे।
यह कानून हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-युक्त रोज़गार की कानूनी गारंटी देता है। यह गारंटी उन सभी ग्रामीण परिवारों को मिलती है जिनके वयस्क सदस्य बिना हुनर ​​वाले शारीरिक काम के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं। यह समृद्ध और मज़बूत ग्रामीण भारत के लिए सशक्तिकरण, विकास, तालमेल और पूर्ण कवरेज को बढ़ावा देता है। यह चार मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है: जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़ा बुनियादी ढांचा और अत्यधिक मौसम की घटनाओं से बचाव। यह एक्ट तालमेल और सैचुरेशन (पूरी तरह से कवरेज) पर आधारित प्लानिंग के ज़रिए 'पूरे-सरकार' (Whole-of-Government) वाले नज़रिए को संस्थागत रूप देता है। इसके केंद्र में 'विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं' (VGPPs) तैयार करना है। ये ग्राम पंचायतों की अलग-अलग तरह की विकास संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एक इंटीग्रेटेड ढांचा प्रदान करती हैं।
VGPPs, VB-G RAM G के तहत एक अहम संस्थागत सुधार हैं। ये ज़मीनी स्तर पर भागीदारी वाली, सबूतों पर आधारित, सैचुरेशन-ओरिएंटेड और तालमेल-आधारित प्लानिंग को संभव बनाती हैं।
VGPPs ग्रामीण विकास की प्लानिंग में स्थानीय ज़रूरतों को केंद्र में रखती हैं। इन्हें ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की सक्रिय भागीदारी से तैयार किया जाता है। ग्राम सभा इन योजनाओं के लिए ज़रूरी सिफारिश और मंज़ूरी देती है। बयान में कहा गया है कि VGPPs गांवों को अपनी वास्तविक विकास ज़रूरतों, मौजूदा संपत्तियों और विकास की कमियों की पहचान करने और उसी के अनुसार कामों को प्राथमिकता देने में सक्षम बनाती हैं।
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