मदुरै: मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने बुधवार को उस महिला के लिए न्याय की मांग को लेकर दायर याचिकाओं का एक समूह बंद कर दिया, जो 2019 में एक सरकारी अस्पताल में अनजाने में दूषित रक्त चढ़ाए जाने के बाद एचआईवी से संक्रमित हो गई थी।

न्यायमूर्ति सीवी कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर शक्तिवेल की पीठ ने याचिकाओं का निपटारा तब किया जब सरकारी वकील ने कहा कि मासिक सहायता की बकाया राशि, जिसे अदालत ने 2021 से महिला को भुगतान करने का निर्देश दिया था, उसे वितरित कर दी गई है।

पीड़िता अपनी गर्भावस्था के दौरान सत्तूर के एक सरकारी अस्पताल में एनीमिया का इलाज कराते समय एचआईवी की चपेट में आ गई थी। घटना सामने आने के बाद हाई कोर्ट ने सरकार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने और अन्य चीजों के अलावा एक घर, एक दोपहिया वाहन और एक सरकारी नौकरी देने का आदेश दिया।

जबकि उपरोक्त निर्देशों का अनुपालन किया गया था, सरकार 22 और 23 दिसंबर, 2020 को अदालत द्वारा पारित आदेशों को लागू करने में विफल रही, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार को जनवरी 2021 से पीड़ित को मासिक सहायता के ऊपर 7,500 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। उक्त आदेश एक सरकारी डॉक्टर द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर पारित किए गए थे कि पीड़िता को अपनी प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए पोषण पर प्रतिदिन 250 से 300 रुपये खर्च करने होंगे।

2 सितंबर को पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि मासिक सहायता का भुगतान छह महीने के लिए किया गया था और उसके बाद इसे बंद कर दिया गया था। न्यायाधीशों ने अधिकारियों को लंबित राशि का भुगतान करने और अदालत को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में, सरकारी वकील ने अदालत को सूचित किया कि पीड़ित को अगस्त 2026 तक का बकाया भुगतान कर दिया गया, जिसके बाद पीठ ने याचिकाएं बंद कर दीं।

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