अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी के विधान परिषद सदस्य लेल्ला अप्पी रेड्डी और पूर्व विधायक टीजेआर सुधाकर बाबू ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों को धमकाया जा रहा है, उनके नामांकन में बाधा डाली जा रही है और राजनीतिक कारणों से गिरफ्तारियां की जा रही हैं। पार्टी ने कथित रूप से पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने वाले 59 पुलिस अधिकारियों को चुनावी ड्यूटी से हटाने की मांग भी की है।
राज्य चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
YSRCP नेताओं ने अपनी शिकायतों में कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।पार्टी के प्रदेश महासचिव और एमएलसी लेल्ला अप्पी रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य के कई इलाकों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया। उनके अनुसार, कुछ स्थानों पर उम्मीदवारों के नामांकन पत्र छीनकर फाड़ दिए गए।पार्टी ने राज्य चुनाव आयोग को विभिन्न घटनाओं से संबंधित शिकायतें सौंपते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित उम्मीदवारों को न्याय दिलाने की मांग की है।
कडप्पा की मेयर उम्मीदवार के घर पर हमले का आरोप
YSRCP नेताओं ने कडप्पा नगर निगम की मेयर पद की उम्मीदवार बंडी दीप्ति रेड्डी के घर पर हुए कथित हमले का मुद्दा भी उठाया।पार्टी के अनुसार, दीप्ति रेड्डी के आवास पर अज्ञात लोगों ने हमला किया। रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अक्टूबर की रात उनके घर पर चाकू और कांच की बोतलें फेंके जाने का आरोप सामने आया है।YSRCP ने दावा किया कि इस घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित पक्ष के लोगों पर ही मामले दर्ज किए।हालांकि, पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
59 पुलिस अधिकारियों को हटाने की मांग
पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।लेल्ला अप्पी रेड्डी और टीजेआर सुधाकर बाबू ने कथित रूप से पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने वाले 59 पुलिस अधिकारियों को चुनावी जिम्मेदारियों से हटाने की मांग की।उनका आरोप है कि कुछ पुलिस अधिकारी विपक्षी उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं।पार्टी नेताओं ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सुरक्षा व्यवस्था में तैनात अधिकारियों का राजनीतिक रूप से तटस्थ रहना आवश्यक है।
22 शहरी निकायों में दोबारा नामांकन की मांग
YSRCP ने राज्य के 22 प्रभावित शहरी स्थानीय निकायों में नामांकन प्रक्रिया दोबारा शुरू करने या चुनाव स्थगित करने की मांग भी की है।पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने राज्य चुनाव आयुक्त को तीन ज्ञापन और एक पेन ड्राइव में वीडियो साक्ष्य सौंपे हैं।इनमें उम्मीदवारों पर कथित हमले, धमकियां, नामांकन पत्र नष्ट करने और नामांकन केंद्रों तक पहुंचने से रोकने जैसी घटनाओं का उल्लेख किया गया है।पार्टी का कहना है कि यदि उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का उचित अवसर नहीं मिला, तो पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे।
कई जिलों में हिंसा और धमकियों के आरोप
YSRCP ने कडप्पा के अलावा तिरुपति, रायचोटी, राजमपेटा और दर्सी सहित कई क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों को परेशान किए जाने का आरोप लगाया है।पार्टी के अनुसार, कुछ स्थानों पर TDP कार्यकर्ताओं ने नामांकन केंद्रों के बाहर भीड़ जमा कर विपक्षी उम्मीदवारों को प्रवेश करने से रोका।वहीं, पूर्व विधायक सुधाकर बाबू ने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों के साथ मारपीट और धमकी की घटनाओं के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
स्थानीय निकाय चुनावों में नामांकन संबंधी विवाद आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है।अदालत ने नामांकन में बाधा का सामना कर रहे उम्मीदवारों को संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायतें रखने का निर्देश दिया था।हाईकोर्ट ने अधिकारियों को चुनावी नियमों के अनुसार शिकायतों पर उचित निर्णय लेने के लिए भी कहा था।
निष्पक्ष चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक चिंता
आंध्र प्रदेश में 28 अक्टूबर को प्रस्तावित स्थानीय निकाय चुनावों से पहले YSRCP और सत्तारूढ़ TDP के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।YSRCP का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिलना चाहिए और हिंसा तथा धमकियों के मामलों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।फिलहाल पार्टी ने राज्य चुनाव आयोग से शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई, प्रभावित उम्मीदवारों की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इन शिकायतों और 59 पुलिस अधिकारियों को हटाने की मांग पर क्या निर्णय लेता है।