Tirupati में तातियागुंटा गंगम्मा जातरा की तैयारी, 5 मई से हफ्तेभर चलेगा पर्व
Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के Tirupati में प्रसिद्ध तातियागुंटा गंगम्मा जातरा के आयोजन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह पारंपरिक उत्सव 5 मई को ‘चतिम्पू’ रस्म के साथ शुरू होगा और 13 मई को ‘विश्वरूप दर्शनम’ तथा ‘चेम्पा थोलागिम्पू’ के साथ संपन्न होगा। यह त्योहार एक सप्ताह तक चलता है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।
यह जातरा देवी Goddess Gangamma को समर्पित है, जिन्हें तिरुपति की रक्षक देवी माना जाता है। मान्यता के अनुसार, देवी गंगम्मा को भगवान Lord Venkateswara की बहन भी माना जाता है। इस कारण इस उत्सव का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
गंगम्मा जातरा अपनी अनोखी परंपराओं और लोक संस्कृति के लिए जानी जाती है। इसमें स्थानीय लोग अलग-अलग वेशभूषा धारण कर देवी की आराधना करते हैं। उत्सव के दौरान पारंपरिक गीत, नृत्य और विभिन्न अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
इस त्योहार की एक खास बात यह भी है कि यह साल के सबसे गर्म समय में आयोजित होता है। ऐसे में इसमें शामिल कई परंपराएं गर्मी से राहत पाने और शरीर को संतुलित रखने से जुड़ी होती हैं। स्थानीय लोग पारंपरिक तरीकों से गर्मी का सामना करते हैं, जो पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं और अनुभवों पर आधारित हैं।
‘चतिम्पू’ रस्म के साथ उत्सव की शुरुआत होती है, जिसमें देवी को विशेष पूजा अर्पित की जाती है और जातरा के प्रारंभ की घोषणा होती है। इसके बाद हर दिन अलग-अलग कार्यक्रम और अनुष्ठान होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं।
अंतिम दिन ‘विश्वरूप दर्शनम’ के दौरान देवी के विशेष रूप के दर्शन कराए जाते हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके बाद ‘चेम्पा थोलागिम्पू’ के साथ उत्सव का समापन होता है। यह समापन भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना कि इसका आरंभ।
स्थानीय प्रशासन ने इस दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करने के लिए तैयारियां की हैं। गर्मी को देखते हुए पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और छाया की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
गंगम्मा जातरा न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह तिरुपति की लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। इस दौरान पूरे शहर में उत्सव का माहौल रहता है और लोग मिलकर इस पर्व को मनाते हैं।