चक्रवात राहत को लेकर आंध्र प्रदेश में सियासी जंग, YSRCP ने उठाए मुआवजा वितरण पर सवाल
आंध्र प्रदेश : चक्रवात अर्नब से हुई तबाही के बाद राहत और मुआवजे को लेकर सियासत तेज हो गई है। विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कुरासाला कन्नाबाबू ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार पर प्रभावित किसानों और परिवारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार राहत पहुंचाने की बजाय प्रचार पर ज्यादा ध्यान दे रही है। कन्नाबाबू ने फसल नुकसान का आकलन करने के लिए किसानों से मोबाइल ऐप पर तस्वीरें अपलोड कराने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और मुआवजे के भुगतान की स्पष्ट समयसीमा घोषित करने की मांग की है।काकीनाडा, 29 अक्टूबर 2026। आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब के कारण बड़े पैमाने पर फसलों, मकानों, बिजली आपूर्ति और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने के बीच विपक्ष ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के क्षेत्रीय समन्वयक और पूर्व मंत्री कुरासाला कन्नाबाबू ने गुरुवार को काकीनाडा स्थित अपने कैंप कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की आलोचना की।उन्होंने आरोप लगाया कि मौसम विभाग की पूर्व चेतावनी के बावजूद राज्य सरकार ने प्रभावित इलाकों में पर्याप्त तैयारी नहीं की। कन्नाबाबू ने सवाल किया कि चक्रवात के दौरान संबंधित मंत्री प्रभावित क्षेत्रों में क्यों नहीं पहुंचे और किसानों की समस्याओं का प्रत्यक्ष जायजा क्यों नहीं लिया गया।
चक्रवात राहत से ज्यादा प्रचार पर ध्यान देने का आरोप
कुरासाला कन्नाबाबू ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राहत और पुनर्वास के वास्तविक कार्यों के बजाय प्रचार गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है।उनका कहना है कि चक्रवात से प्रभावित किसान और ग्रामीण परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाली सहायता और मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।उन्होंने कहा कि सरकार को प्रचार कार्यक्रमों के बजाय प्रभावित परिवारों की समस्याएं दूर करने, फसलों का सही आकलन करने और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए।हालांकि, ये आरोप विपक्षी नेता के हैं। राज्य सरकार का कहना है कि चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
8.30 लाख एकड़ में फसलों के नुकसान का दावा
कन्नाबाबू ने फसलों के नुकसान से संबंधित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी अनुमान के अनुसार लगभग 8.30 लाख एकड़ क्षेत्र में कृषि फसलें प्रभावित हुई हैं।उन्होंने दावा किया कि इनमें करीब 7.60 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की फसल को नुकसान पहुंचा है।पूर्व मंत्री ने सवाल उठाया कि इतने बड़े पैमाने पर नुकसान होने के बावजूद धान उत्पादक किसानों के लिए पर्याप्त मुआवजे की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।उन्होंने सरकार से किसानों को मिलने वाली सहायता की राशि बढ़ाने और वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा निर्धारित करने की मांग की।कन्नाबाबू ने यह भी कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए राहत प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए।
मोबाइल ऐप से फसलों की फोटो अपलोड कराने पर आपत्ति
कन्नाबाबू ने सरकार की उस व्यवस्था पर सवाल उठाए, जिसके तहत किसानों से अपनी क्षतिग्रस्त फसलों की तस्वीरें मोबाइल ऐप पर अपलोड करने को कहा गया है।उन्होंने पूछा कि यदि किसानों को खुद अपनी फसलों के नुकसान की तस्वीरें खींचकर ऑनलाइन अपलोड करनी पड़ेंगी, तो कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका क्या रह जाएगी।उनका कहना था कि ग्रामीण इलाकों में सभी किसानों के पास स्मार्टफोन, इंटरनेट और डिजिटल तकनीक की पर्याप्त जानकारी नहीं होती।ऐसे में आवेदन की जटिल प्रक्रिया के कारण पात्र किसान मुआवजे से वंचित रह सकते हैं।उन्होंने मांग की कि संबंधित विभागों के कर्मचारी प्रभावित खेतों का दौरा करें और मौके पर ही नुकसान का सही आकलन तैयार करें।
मुआवजे की समयसीमा घोषित करने की मांग
पूर्व मंत्री ने चक्रवात प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की।उन्होंने 14 नवंबर 2023 के सरकारी आदेश संख्या पांच का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल में सहायता के मानकों में संशोधन किया गया था।कन्नाबाबू ने मांग की कि मौजूदा सरकार भी धान उत्पादकों को उन्हीं संशोधित मानकों के अनुरूप पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराए।उनका कहना था कि किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए समय पर धनराशि मिलना जरूरी है।
फसल बीमा और इनपुट सब्सिडी को लेकर भी सवाल
कन्नाबाबू ने पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच किसानों के लिए कई योजनाएं संचालित की गई थीं।उन्होंने दावा किया कि उस समय रायथु भरोसा केंद्रों के माध्यम से फसलों का पंजीकरण, मुफ्त फसल बीमा और किसानों को आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई थी।कन्नाबाबू के अनुसार, कुछ मामलों में किसानों को प्रति एकड़ 23 हजार से 29 हजार रुपये तक बीमा मुआवजा मिला था।उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार द्वारा बीमा प्रीमियम में अपने हिस्से का भुगतान नहीं किए जाने से किसानों को पर्याप्त बीमा सुरक्षा और समय पर इनपुट सब्सिडी नहीं मिल रही है।इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं की गई है।
मछुआरों और पट्टेदार किसानों के लिए भी सहायता मांगी
वाईएसआरसीपी नेता ने कहा कि चक्रवात से केवल कृषि फसलों को ही नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि मछुआरे और जलीय कृषि से जुड़े परिवार भी प्रभावित हुए हैं।उन्होंने मांग की कि जिन मछुआरों की नावें और मछली पकड़ने के जाल क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें भी उचित मुआवजा दिया जाए।इसके अतिरिक्त किराये की जमीन पर खेती करने वाले पट्टेदार किसानों को राहत योजनाओं में शामिल करने की आवश्यकता जताई।कन्नाबाबू ने कहा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने या तालाब क्षतिग्रस्त होने के कारण नुकसान उठाने वाले जलीय कृषि किसानों को भी सहायता मिलनी चाहिए।उन्होंने प्रभावित इलाकों में चिकित्सा शिविर लगाने और लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की।
चुनावी प्रक्रिया स्थगित करने की भी मांग
पूर्व मंत्री ने काकीनाडा के चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में चल रही चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जमीनी सत्यापन और लोगों की आपत्तियों का समाधान होने तक संबंधित चुनावी प्रक्रियाओं को स्थगित करने पर विचार किया जाना चाहिए।कन्नाबाबू ने प्रशासन से राहत वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली सहायता का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दिया राहत कार्य तेज करने का निर्देशविपक्ष के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को जिला कलेक्टरों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस के जरिए राहत कार्यों की समीक्षा की।मुख्यमंत्री ने प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल करने, सड़कों से गिरे पेड़ हटाने और मुआवजे की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।उन्होंने फसल नुकसान के अलावा अन्य क्षतियों के मामलों में सहायता जल्द उपलब्ध कराने को कहा। कृषि अधिकारियों को किसानवार नुकसान का आकलन तैयार करने और जलमग्न फसलों को बचाने के उपाय तलाशने के निर्देश भी दिए गए।सरकार का कहना है कि सामान्य स्थिति बहाल होने तक राहत एवं पुनर्वास कार्य जारी रहेंगे।
चक्रवात राहत को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब के बाद राहत कार्यों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।जहां वाईएसआरसीपी सरकार पर प्रचार में व्यस्त रहने और किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगा रही है, वहीं मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू प्रशासनिक तैयारियों और राहत कार्यों की लगातार समीक्षा करने की बात कह रहे हैं।फिलहाल प्रभावित किसानों और परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल मुआवजे के वास्तविक भुगतान, नुकसान के सही आकलन और सामान्य जनजीवन की बहाली से जुड़ा है। आने वाले दिनों में राहत राशि के वितरण और सरकारी सहायता की प्रगति पर सबकी नजर रहेगी।