विशाखापत्तनम: विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन ने सोमवार को 'स्टेशन महोत्सव' के साथ अपनी 130वीं वर्षगांठ मनाई। इस मौके पर हेरिटेज एग्ज़िबिशन (धरोहर प्रदर्शनी), सांस्कृतिक कार्यक्रम और 'वाल्टेयर विशाखापत्तनम' नाम की एक यादगार कॉफ़ी टेबल बुक लॉन्च की गई।

समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए साउथ कोस्ट रेलवे के जनरल मैनेजर संदीप माथुर ने 1896 में स्टेशन की शुरुआत से लेकर आज एक बड़े रेलवे हब बनने तक के सफ़र पर रोशनी डाली।

उन्होंने बताया कि जिस स्टेशन पर शुरुआत में सिर्फ़ दो प्लेटफ़ॉर्म थे और रोज़ाना लगभग 200 यात्री आते थे, वहाँ अब आठ प्लेटफ़ॉर्म हैं और रोज़ाना 65,000 से ज़्यादा यात्री आते-जाते हैं।

उन्होंने कहा कि स्टेशन को 14 प्लेटफ़ॉर्म तक बढ़ाने के लिए फिर से विकसित किया जा रहा है, जिसमें आधुनिक सुविधाएँ, बेहतर कनेक्टिविटी और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होगा। उन्होंने कहा कि यह विकास 'विरासत भी, विकास भी' के विज़न को दिखाता है, जिसका मकसद आधुनिक सुविधाओं और टेक्नोलॉजी को अपनाते हुए विरासत को बचाए रखना है।

समारोह की शुरुआत फ़्लैग मार्च से हुई, जिसके बाद ऐतिहासिक फ़ोटो एग्ज़िबिशन और हेरिटेज आर्टिफ़ैक्ट्स (धरोहर से जुड़ी चीज़ों) की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें स्टेशन के विकास और पुराने वाल्टेयर डिवीज़न की विरासत को दिखाया गया।

कार्यक्रम में कॉफ़ी टेबल बुक लॉन्च करना, हीलियम बैलून उड़ाना, यादगार स्मृति-चिह्न बांटना और स्थानीय कला व परंपराओं को दिखाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल थे।

विशाखापत्तनम डिवीज़नल रेलवे मैनेजर ललित बोहरा ने वाल्टेयर से आज की स्थिति तक स्टेशन के 130 साल के सफ़र के बारे में बताया। उन्होंने स्टेशन के पुनर्विकास में सहयोग के लिए विशाखापत्तनम के लोगों का धन्यवाद किया।

 

Tags: