विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पिछली YSRCP सरकार की तीन राजधानियाँ बनाने की योजना को चुनौती देने वाली कई याचिकाएँ अब बेअसर हो जाएँगी, क्योंकि संसद ने अमरावती को राज्य की राजधानी के तौर पर कानूनी मान्यता दे दी है। कोर्ट ने पक्षों को यह भी निर्देश दिया कि वे ऐसी किसी भी दूसरी याचिका का विवरण पेश करें जो बेअसर हो गई हैं, और कहा कि मामलों को मुद्दे के आधार पर वर्गीकृत करने से उनके निपटारे में आसानी होगी।

चीफ जस्टिस लिसा गिल और जस्टिस एन. जयसूर्या और बी.एस. भानुमति की तीन जजों की बेंच ने राज्य की राजधानी से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए। बेंच ने आगे की कार्यवाही को इसलिए भी टाल दिया क्योंकि इस बात की संभावना है कि हाई कोर्ट के 3 मार्च, 2022 के फैसले के खिलाफ पिछली सरकार द्वारा दायर अपीलें 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आ सकती हैं।

याद दिला दें कि राजधानी क्षेत्र अमरावती के किसानों और कई अन्य लोगों ने आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (CRDA) अधिनियम को रद्द करने और प्रस्तावित तीन-राजधानी व्यवस्था के माध्यम से प्रशासन के विकेंद्रीकरण का प्रावधान करने वाले कानून को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद, तीन जजों की बेंच ने 3 मार्च, 2022 को अमरावती को एकमात्र राजधानी माना और राजधानी शहर के विकास से संबंधित अपने निर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक 'कंटीन्यूइंग मैंडमस' (लगातार निगरानी का आदेश) जारी किया।

 

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