अमरावती। आंध्र प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को मंगलगिरि में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री नायडू ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जगन प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ने का माहौल दिखाकर आंध्र प्रदेश की प्रतिष्ठा और उसकी ब्रांड छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।नायडू के मुताबिक, राज्य में कानून-व्यवस्था ध्वस्त होने का दावा करके राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग करना जगन की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, ये आरोप मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य नहीं माना जा सकता।
जगन पर राष्ट्रपति शासन की मांग को लेकर निशाना
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि जगन मोहन रेड्डी के बयान कई बार समझ से परे होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जगन का मुख्य उद्देश्य यह साबित करना है कि आंध्र प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह बिगड़ चुकी है, ताकि केंद्र सरकार पर राष्ट्रपति शासन लागू करने का दबाव बनाया जा सके।नायडू ने दावा किया कि ऐसे बयानों से प्रदेश की छवि प्रभावित होती है और निवेश तथा विकास के माहौल पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का ध्यान विकास, जनकल्याण और सुशासन पर केंद्रित है।
बार-बार अदालत जाने पर भी साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने जगन मोहन रेड्डी की कानूनी रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी नेता को राजनीति की आड़ में लगातार मुकदमेबाजी करने वाला बताया।नायडू ने आरोप लगाया कि जगन और उनकी पार्टी बार-बार अदालतों में याचिकाएं दाखिल करते हैं और तत्काल सुनवाई के लिए लंच मोशन का सहारा लेते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, कई बार इन मामलों की सुनवाई आगे टल जाती है, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष की ओर से कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक मुद्दों को उठाने के लिए किया जाता है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जगन बेंगलुरु से लौटने के बाद लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और राज्य सरकार के खिलाफ भ्रामक बयान देते हैं। ये मुख्यमंत्री के आरोप हैं; संबंधित मामलों और याचिकाओं के परिणाम के बारे में विस्तृत जानकारी इस बयान में नहीं दी गई।
स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भी सियासी टकराव
आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और YSRCP के बीच स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया को लेकर भी विवाद जारी है। जगन मोहन रेड्डी ने पहले आरोप लगाया था कि विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका जा रहा है और कई स्थानों पर हिंसा तथा दबाव की घटनाएं हुई हैं।जगन ने इन्हीं आरोपों के आधार पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की थी। दूसरी ओर, नायडू और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाते हुए YSRCP पर राजनीतिक माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया है।इस तरह दोनों पक्ष कानून-व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। चुनाव संबंधी शिकायतों और हिंसा के आरोपों की वास्तविक स्थिति का आकलन संबंधित अधिकारियों तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकता है।
आंध्र प्रदेश की छवि और विकास का मुद्दा
नायडू ने कहा कि किसी भी राज्य की प्रतिष्ठा उसके विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी होती है। उनके अनुसार, राजनीतिक मतभेदों को इस तरह नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे प्रदेश की छवि खराब हो।मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सरकार के कामकाज को लेकर लगातार नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।वहीं, YSRCP का पक्ष है कि राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की रक्षा के लिए सवाल उठाना जरूरी है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से आंध्र प्रदेश की राजनीति में तनाव बना हुआ है।
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