आंध्र: YSR कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री YS जगन मोहन रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि चुनावी सुधारों की जरूरत आज जितनी साफ कभी नहीं दिखी। उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में नगर निकाय चुनाव हर स्तर पर धांधली से भरे थे और विपक्ष को मुकाबला करने का मौका ही नहीं दिया गया।
मतगणना के रुझानों से संकेत मिल रहा है कि तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 100 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के चुनावों में लगभग पूरी तरह से जीत हासिल करने जा रहा है। इसके बाद, जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने चंद्रबाबू नायडू की टीम, पुलिस और राज्य चुनाव आयोग (SEC) पर तंज कसते हुए उन्हें 'बधाई' दी। X (ट्विटर) पर एक पोस्ट में YSRCP प्रमुख ने कहा, "आपने दिखा दिया है कि विपक्ष को मुकाबला करने का मौका दिए बिना, चुनाव में शानदार जीत कैसे हासिल की जाती है।" उन्होंने आगे कहा, "हर चरण में धांधली हुई: * नामांकन: हाईजैक कर लिया गया! * जांच (स्क्रूटनी): हाईजैक कर ली गई! * नाम वापसी: हाईजैक कर ली गई! * पोलिंग एजेंट: रोके गए या बाहर निकाल दिए गए! * मतदान: धांधली हुई! * मतदान प्रतिशत: हेरफेर की गई! * मतगणना: हाईजैक कर ली गई!" जगन ने कहा कि उम्मीदवार चंद्रबाबू नायडू ने चुने थे, न कि जनता ने। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "ये चुनाव नहीं, बल्कि 'चयन' (सिलेक्शन) हैं! चुनावी सुधारों की जरूरत आज जितनी साफ कभी नहीं दिखी!"
इस बीच, YSRCP के SC सेल के प्रदेश अध्यक्ष TJR सुधाकर बाबू ने 3 नवंबर को आंध्र प्रदेश के राजनीतिक इतिहास का 'काला दिन' करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पुलिस की ताकत, डराने-धमकाने और TDP के गुंडों के जरिए पूरी नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया को हाईजैक कर लिया है।
YSRCP के केंद्रीय कार्यालय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू नायडू ने निष्पक्ष चुनाव के जरिए जनता का जनादेश मांगने के बजाय, दिन-दहाड़े लोकतंत्र की हत्या कर दी है। सुधाकर बाबू ने कहा कि सत्ता में ढाई साल रहने के बाद, चंद्रबाबू नायडू को अपनी सरकार के विकास कार्यों का हिसाब लेकर मतदाताओं के पास जाना चाहिए था।
इसके बजाय, 'सुपर सिक्स' वादों और अन्य चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रहने के बाद, उन्होंने अपनी सरकार की नाकामियों को छिपाने के लिए लोगों को डराने-धमकाने का रास्ता अपनाया। नामांकन रोकने और योग्य उम्मीदवारों को खारिज करने से लेकर, नाम वापस लेने के दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर करने, मतदाताओं को धमकाने, पोलिंग एजेंटों को जबरन बाहर निकालने और जीत की घोषणा वाले फॉर्म फाड़ने तक, चुनावी प्रक्रिया के हर चरण को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया गया।
उन्होंने रायलसीमा, प्रकाशम, गुंटूर और पलनाडु में गुटीय राजनीति और हिंसा को जानबूझकर फिर से बढ़ावा दिए जाने की निंदा की। सांसदों पर हमले, विधायकों को नजरबंद करना और चुने हुए प्रतिनिधियों पर पाबंदियां लगाना, चंद्रबाबू के प्रशासन में लोकतंत्र की खतरनाक स्थिति को उजागर करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सरकार किसानों को इनपुट सब्सिडी और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने, महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने, छात्रों की फीस समय पर वापस करने या बेरोजगारों को भत्ता देने में विफल रही, वह डरा-धमकाकर हासिल की गई चुनावी जीत का जश्न कैसे मना सकती है?
सुधाकर बाबू ने कहा कि डीजीपी से लेकर निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक पूरे पुलिस तंत्र, और साथ ही रिटर्निंग अधिकारियों व चुनाव अधिकारियों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया गया। राज्य चुनाव आयोग से बार-बार शिकायत करने के बावजूद न्याय नहीं मिला, जबकि निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार संस्थाओं ने सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में काम किया।