श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश): ISRO ने शुक्रवार को अपना नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसमें स्वदेशी और बाहर से खरीदी गई एटॉमिक घड़ियाँ लगी हैं। यह देश के अपने सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम 'NavIC' (जो GPS का भारतीय संस्करण है) को एक बड़ा बढ़ावा देगा। NavIC मुख्य रूप से भारत और उसके आसपास 1,500 km के दायरे तक सीमित है। ISRO ने बताया कि सैटेलाइट को उसकी 'निर्धारित कक्षा' (ऑर्बिट) में स्थापित कर दिया गया है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा, "GSLV F18 रॉकेट ने NVS-03 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में पहुँचा दिया है। GSLV F18-NVS03 मिशन पूरी तरह सफल रहा है।"
यह नई पीढ़ी का सैटेलाइट पहले से काम कर रहे तीन अन्य नेविगेशन सैटेलाइट्स (जिनमें NVS-01 भी शामिल है) के साथ मिलकर काम करेगा। यह एक मजबूत भारतीय मानक समय (IST) के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेगा, खासकर तब जब सरकार ने हाल ही में 'लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026' को अधिसूचित किया है। NVS-03 को ले जाने वाला 50 मीटर लंबा GSLV रॉकेट, 24 घंटे के काउंटडाउन के बाद, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से रात 11:51 बजे (निर्धारित समय पर) उड़ान भर गया।
लगभग 18 मिनट की उड़ान के दौरान रॉकेट के तीनों चरण (stages) - जिनमें जटिल क्रायोजेनिक ऊपरी चरण भी शामिल है - सफलतापूर्वक काम कर गए। इसके बाद, मुख्य सैटेलाइट लॉन्च रॉकेट से अलग हो गया और 'जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट' (GTO) में पहुँच गया। इस निर्धारित कक्षा में पृथ्वी के सबसे करीब का बिंदु (पेरिगी) 170 km और सबसे दूर का बिंदु (अपोगी) 37,023 km है।
2,232 kg वजनी NVS-03 सैटेलाइट अब अपने ऑनबोर्ड प्रोपल्शन सिस्टम (इंजन) का इस्तेमाल करके अपनी अंतिम जगह, यानी 32.5 डिग्री पूर्वी देशांतर (Geosynchronous slot) तक पहुँचेगा। प्रोपल्शन सिस्टम की विश्वसनीयता पक्की करने के लिए, ISRO ने इस सैटेलाइट को लॉन्च करते समय इसके 'पायरोटेक्निक वाल्व' को पहले से ही खुला रखा था। सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया यह एक अनोखा कदम था। इस उपग्रह में स्वदेशी रुबिडियम एटॉमिक क्लॉक लगी है। यह 'नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन' (NavIC) सिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह L1, L5 और S बैंड में सिग्नल भेजेगा, जिससे भारत की क्षेत्रीय पोजिशनिंग सेवाएं और मजबूत होंगी। ISRO के अनुसार, NavIC भारत का अपना स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है। इसे भारत के उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ भारतीय भू-भाग से लगभग 1500 km दूर तक के क्षेत्र में सटीक पोजिशन, नेविगेशन और टाइमिंग (PNT) सेवाएं देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया, "NVS-03 अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा उपग्रह है। इसे IRNSS सीरीज की नेविगेशन सेवाओं को लगातार जारी रखने के लिए तैयार किया गया है। इस उपग्रह में बाहर से खरीदी गई एटॉमिक क्लॉक के साथ-साथ स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक भी लगी है। इसमें मौजूदा L5/S सिग्नलों के अलावा L1 सिग्नल भी शामिल हैं। इसका कवरेज भारतीय भू-भाग और भारत की भौगोलिक सीमाओं के चारों ओर 1500 km तक के क्षेत्र में है।"