विशाखापत्तनम। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में कई महत्वपूर्ण स्वदेशी जहाज निर्माण और समुद्री बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने नए स्लिपवे और गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही फ्लीट सपोर्ट शिप-1 ‘सूर्य’ को लॉन्च किया गया, जबकि फ्लीट सपोर्ट शिप-5 की कील रखकर उसके निर्माण की औपचारिक शुरुआत की गई।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इन परियोजनाओं की शुरुआत भारत की बढ़ती समुद्री ताकत, स्वदेशी क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार बढ़ते कदमों को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जहाज निर्माण के क्षेत्र में देश की क्षमताएं लगातार मजबूत हो रही हैं और नई सुविधाओं के जुड़ने से भविष्य में बड़े और आधुनिक जहाजों के निर्माण को गति मिलेगी।
राजनाथ सिंह ने कहा, “आज हमने एक नए स्लिपवे और गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया है। हम एक नए फ्लीट सपोर्ट शिप की कील रख रहे हैं और हमने ‘सूर्य’ नाम के फ्लीट सपोर्ट शिप-1 को भी लॉन्च किया है।” उन्होंने इन उपलब्धियों को देश के संकल्प और बढ़ती समुद्री क्षमता का प्रतीक बताया।नए स्लिपवे और गोलियथ क्रेन की शुरुआत हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की जहाज निर्माण क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। जहाज निर्माण के दौरान स्लिपवे एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा होता है, जिसकी सहायता से बड़े जहाजों के निर्माण और उन्हें पानी में उतारने की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाता है। वहीं गोलियथ क्रेन भारी उपकरणों और जहाज के बड़े हिस्सों को उठाने और स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नई सुविधाओं से हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड को बड़े आकार के जहाजों के निर्माण में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही जहाज निर्माण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में भी मदद मिल सकती है।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण फ्लीट सपोर्ट शिप-1 ‘सूर्य’ की लॉन्चिंग रही। फ्लीट सपोर्ट शिप नौसेना के बेड़े को समुद्र में लंबे समय तक अभियान चलाने में सहायता देने के उद्देश्य से तैयार किए जाते हैं। ऐसे जहाज समुद्र में तैनात युद्धपोतों और अन्य नौसैनिक जहाजों को आवश्यक रसद सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘सूर्य’ की लॉन्चिंग को भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल एक जहाज की लॉन्चिंग नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, औद्योगिक शक्ति और समुद्री सुरक्षा से जुड़े संकल्प का भी प्रदर्शन है।इसी कार्यक्रम में फ्लीट सपोर्ट शिप-5 की कील भी रखी गई। किसी जहाज की कील रखना उसके निर्माण की महत्वपूर्ण शुरुआती प्रक्रिया मानी जाती है। इसके साथ ही जहाज निर्माण का औपचारिक चरण शुरू हो जाता है। फ्लीट सपोर्ट शिप-5 के निर्माण की शुरुआत से हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में चल रहे बड़े जहाज निर्माण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि नए स्लिपवे का उद्घाटन, नए जहाज की कील रखना और ‘सूर्य’ का लॉन्च होना भारत की उपलब्धियों तथा भविष्य के संकल्प दोनों को दर्शाता है। उन्होंने समुद्री क्षेत्र में देश की क्षमता बढ़ाने और स्वदेशी निर्माण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी जहाज निर्माण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू स्तर पर आधुनिक जहाज तैयार होने से विदेशी तकनीक और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में मदद मिलती है। साथ ही भारतीय उद्योगों, इंजीनियरिंग कंपनियों और जहाज निर्माण से जुड़े तकनीकी क्षेत्र को भी नई परियोजनाओं से अवसर प्राप्त होते हैं।
विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में शुरू की गई नई सुविधाएं भविष्य की जहाज निर्माण परियोजनाओं के लिए भी उपयोगी साबित होंगी। बड़े जहाजों के निर्माण के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है और नया स्लिपवे तथा गोलियथ क्रेन इसी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।रक्षा मंत्री की मौजूदगी में एक ही कार्यक्रम में बुनियादी ढांचे का उद्घाटन, नए जहाज की लॉन्चिंग और दूसरे जहाज की कील रखने से भारत की समुद्री निर्माण क्षमता के विस्तार का संदेश भी सामने आया। इन परियोजनाओं के माध्यम से स्वदेशी जहाज निर्माण को और गति मिलने की उम्मीद है।फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्य’ की लॉन्चिंग के साथ भारत ने समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वहीं फ्लीट सपोर्ट शिप-5 के निर्माण की शुरुआत और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में नई सुविधाओं के उद्घाटन से आने वाले समय में देश की नौसैनिक और जहाज निर्माण क्षमता को और मजबूती मिलने की संभावना है।