पोलावरम। आंध्र प्रदेश के पोलावरम जिले में मलेरिया की रोकथाम के लिए दवा दिए जाने के बाद सात वर्षीय बच्ची की मौत और 53 अन्य लोगों के बीमार पड़ने से हड़कंप मच गया है। बीमार लोगों में 46 बच्चे और सात वयस्क शामिल हैं। सभी को इलाज के लिए तेलंगाना के भद्राचलम स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिला प्रशासन के मुताबिक अस्पताल में भर्ती सभी लोगों की हालत फिलहाल स्थिर है।
घटना एटापाका तालुक के गोल्लागुप्पा गांव की बताई जा रही है। मंगलवार को एक मेडिकल टीम मलेरिया की रोकथाम के अभियान के तहत गांव पहुंची थी। टीम ने गांव के लोगों को क्लोरोक्विन की गोलियां वितरित कीं। जानकारी के मुताबिक कुल 71 लोगों को दवा दी गई थी। इनमें स्कूली छात्र भी शामिल थे।
मलेरिया से बचाव के उद्देश्य से दी गई दवा के बाद शाम होते-होते कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। इसी गांव की सात वर्षीय छात्रा मादिवी जमुना घर लौटने के बाद उल्टी करने लगी। बच्ची की हालत बिगड़ती देख परिवार के सदस्य उसे इलाज के लिए लक्ष्मीपुरम अस्पताल लेकर पहुंचे।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्ची की जांच की, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की मौत हो चुकी थी। सात वर्षीय जमुना की अचानक मौत के बाद परिवार और गांव में मातम पसर गया। घटना की जानकारी प्रशासन तक पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया।
बताया जा रहा है कि बच्ची ने क्लोरोक्विन की तीन गोलियां खाई थीं। हालांकि उसकी मौत का वास्तविक कारण क्या था, यह विस्तृत जांच और चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। दवा दिए जाने और उसके बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने के घटनाक्रम को देखते हुए प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है।
जमुना के अलावा गांव में बड़ी संख्या में अन्य लोगों की भी तबीयत खराब होने लगी। स्कूल के विद्यार्थियों और आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों समेत कुल 53 लोगों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी सामने आई। इसके बाद सभी को उपचार के लिए तेलंगाना के भद्राचलम स्थित अस्पताल ले जाया गया।
जिला मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार के अनुसार बीमार पड़े 53 लोगों में 46 बच्चे और सात वयस्क शामिल हैं। सभी का अस्पताल में उपचार चल रहा है और फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई गई है। प्रशासन की ओर से मरीजों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।
एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि इसका कारण दवा की प्रतिक्रिया थी या कोई अन्य वजह। खास तौर पर बच्चों में एक साथ लक्षण दिखाई देने के कारण दवा की मात्रा, उसके वितरण और सेवन की पूरी प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
क्लोरोक्विन का इस्तेमाल मलेरिया के उपचार और कुछ परिस्थितियों में इसकी रोकथाम के लिए किया जाता रहा है। हालांकि किसी भी दवा की खुराक व्यक्ति की उम्र, वजन और चिकित्सकीय स्थिति जैसे कारकों के आधार पर तय की जाती है। इस घटना में बच्चों को कितनी मात्रा में दवा दी गई और सेवन को लेकर क्या निर्देश दिए गए थे, यह जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।
घटना के बाद ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। मलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा दी गई दवा के बाद एक बच्ची की मौत और दर्जनों लोगों के बीमार होने से अभियान को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और घटना के कारणों का जल्द खुलासा किए जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
प्रशासन के लिए सबसे पहली प्राथमिकता अस्पताल में भर्ती लोगों का समुचित इलाज सुनिश्चित करना है। 46 बच्चों के बीमार होने के कारण स्वास्थ्य विभाग भी स्थिति को गंभीरता से देख रहा है। मरीजों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि किसी की हालत बिगड़ने पर तत्काल जरूरी उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
इस घटना में स्कूल और आंगनवाड़ी से जुड़े बच्चों का बड़ी संख्या में प्रभावित होना विशेष चिंता का विषय है। मलेरिया नियंत्रण जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के दौरान दवाओं के वितरण में निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन बेहद महत्वपूर्ण होता है। बच्चों के मामले में दवा की सही मात्रा और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां और भी जरूरी हो जाती हैं।
मादिवी जमुना की मौत के बाद यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दवा खाने और उल्टी शुरू होने के बीच कितना समय था तथा बच्ची को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या तो नहीं थी। इन सभी पहलुओं से घटना के वास्तविक कारण को समझने में मदद मिल सकती है।
मेडिकल टीम ने गोल्लागुप्पा गांव में कुल 71 लोगों को क्लोरोक्विन की गोलियां दी थीं। इसके बाद 53 लोगों के बीमार पड़ने का आंकड़ा काफी बड़ा है। ऐसे में दवा के बैच, वितरण की प्रक्रिया और प्रभावित लोगों में सामने आए लक्षणों की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जिला प्रशासन ने फिलहाल राहत की बात यह बताई है कि अस्पताल में भर्ती सभी 53 लोगों की स्थिति स्थिर है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। बच्ची की मौत के सही कारण की पुष्टि होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना का सीधा संबंध दवा से था या इसके पीछे कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।
फिलहाल गोल्लागुप्पा गांव में हुई इस घटना ने मलेरिया रोकथाम अभियान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सात वर्षीय बच्ची की मौत से परिवार सदमे में है, जबकि 46 बच्चों समेत 53 लोगों के अस्पताल पहुंचने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की निगाहें जांच और मरीजों के उपचार पर टिकी हुई हैं।