माइक्रोप्लास्टिक और PFAS प्रदूषण पर जुटेंगे देश-विदेश के विशेषज्ञ, 1 दिसंबर से कार्यशाला
विशाखापत्तनम। पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए बढ़ती चुनौती बन रहे माइक्रोप्लास्टिक और PFAS प्रदूषण पर चर्चा के लिए दिसंबर में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। यह कार्यक्रम 1 दिसंबर से शुरू होगा। इसका आयोजन शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने वाली योजना (SPARC) के समर्थन से किया जा रहा है।
कार्यशाला का विषय 'PFAS और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण: उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों और नवीन समाधान रणनीतियों से लेकर नीति-निर्माण तक' रखा गया है। इसका उद्देश्य लगातार उभरते प्रदूषकों से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को होने वाले संभावित नुकसान से जुड़े मुद्दों पर वैज्ञानिक चर्चा करना है।
इस दो दिवसीय आयोजन में माइक्रोप्लास्टिक और पर- एवं पॉलीफ्लोरोएल्काइल पदार्थों (PFAS) से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदूषण की पहचान, उसके प्रभावों का अध्ययन और नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को मिलेगा साझा मंच
कार्यशाला के माध्यम से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाने की योजना है। इसका उद्देश्य अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों के बीच अनुसंधान और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम में उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों और प्रदूषण नियंत्रण के लिए नवीन समाधान रणनीतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी से माइक्रोप्लास्टिक और PFAS प्रदूषण से जुड़ी चुनौतियों को समझने तथा उनके समाधान की दिशा में काम करने का अवसर मिलेगा।
प्रदूषण के प्रभाव और समाधान पर होगी चर्चा
कार्यशाला के प्रमुख विषयों में पर्यावरण में PFAS और माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी, उनके प्रभाव और विषाक्तता संबंधी अध्ययन शामिल हैं। इसके अलावा इन प्रदूषकों की पहचान और विश्लेषण के लिए उन्नत तकनीकों पर भी चर्चा होगी।
प्रदूषण को कम करने और इन पदार्थों के विनाश के लिए विकसित की जा रही तकनीकों के साथ-साथ प्रभावी नीतियां तैयार करने के मुद्दे भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। वैज्ञानिक अनुसंधान और नीतिगत प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी इस आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य है।
GITAM और कनाडा के संस्थान मिलकर करेंगे आयोजन
इस कार्यशाला का संयुक्त आयोजन GITAM स्कूल ऑफ साइंस के रसायन विज्ञान विभाग, मॉन्ट्रियल विश्वविद्यालय और एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट चेंज कनाडा द्वारा किया जा रहा है। इस सहयोग के जरिए पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित अनुसंधान और तकनीकी ज्ञान को साझा करने का प्रयास किया जाएगा।
स्कूल ऑफ साइंस की निदेशक चंदू कविता, रसायन विज्ञान विभाग के प्रमुख एनवीएस वेणुगोपाल और कार्यशाला की संयोजक मनोर पीआर ने कार्यक्रम का पोस्टर जारी किया। इसके साथ ही इच्छुक प्रतिभागियों को कार्यशाला में शामिल होने के लिए पंजीकरण कराने की जानकारी दी गई।
13 नवंबर तक करा सकते हैं पंजीकरण
आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला में भाग लेने के इच्छुक प्रतिभागी 13 नवंबर तक या उससे पहले पंजीकरण करा सकते हैं। कार्यक्रम से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति mrayarot@gitam.edu पर ईमेल कर सकते हैं। इसके अलावा 9207979539 मोबाइल नंबर पर भी संपर्क किया जा सकता है।
इस कार्यशाला के जरिए पर्यावरण में बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक और PFAS प्रदूषण से जुड़ी वैज्ञानिक चुनौतियों, उनके विश्लेषण और संभावित समाधान रणनीतियों पर विशेषज्ञों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा।