अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP), मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और राज्य चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। जगन ने चुनाव अधिकारियों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने की आवश्यकता जताई।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
पत्रकारों से बातचीत में जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों को परेशान किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि चुनाव अधिकारियों को सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में सत्तारूढ़ दल को कथित तौर पर अनुचित लाभ मिल रहा है।जगन ने राज्य चुनाव आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग विपक्ष की शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रहा है।हालांकि, ये आरोप वाईएसआरसीपी अध्यक्ष के हैं और इन्हें प्रमाणित चुनावी अनियमितताओं के रूप में नहीं देखा जा सकता।
2019 के चुनावों का किया जिक्र
जगन मोहन रेड्डी ने राज्य चुनाव आयुक्त के पिछले प्रशासनिक कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि अनिल चंद्र पुनेठा इससे पहले चंद्रबाबू नायडू के मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य के मुख्य सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं।जगन ने वर्ष 2019 के चुनावों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय चुनाव आयोग के निर्देशों की अनदेखी की गई थी।उनका कहना था कि वर्तमान चुनाव आयुक्त का पिछला प्रशासनिक रिकॉर्ड उनकी निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा करता है।हालांकि, किसी अधिकारी का पूर्व में किसी सरकार के अधीन कार्य करना अपने आप में पक्षपात का प्रमाण नहीं है। जगन के आरोपों का मूल्यांकन संबंधित साक्ष्यों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
नामांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका जा रहा है।उनके अनुसार, कई स्थानों पर उम्मीदवारों के नामांकन पत्र छीने गए और कुछ मामलों में दस्तावेज स्वीकार करने से इनकार किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी कार्यकर्ताओं को धमकियां दी जा रही हैं और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने की कोशिश की जा रही है।जगन ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनावी अनियमितताओं से संबंधित साक्ष्य राज्य चुनाव आयोग, राज्यपाल और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उठाया मुद्दा
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 19 अक्टूबर को राज्य चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।अदालत ने उम्मीदवारों की सुरक्षा, नामांकन केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था और पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने पर जोर दिया था।जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि इन निर्देशों के बावजूद कई स्थानों पर चुनावी प्रक्रिया में बाधाएं उन्होंने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
TDP ने भी YSRCP पर लगाए आरोप
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी ने जगन मोहन रेड्डी के आरोपों का विरोध किया है।टीडीपी ने राज्य चुनाव आयोग को शिकायत देकर वाईएसआरसीपी कार्यकर्ताओं पर हिंसा, धमकी और चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं।पार्टी नेताओं ने दावा किया कि विपक्षी कार्यकर्ता राजनीतिक तनाव बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी जगन पर चुनाव आयोग को दबाव में लेने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति राजनीतिक दलों का रवैया परिस्थितियों के अनुसार नहीं बदलना चाहिए।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग
जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता भी जताई है।उन्होंने हाल ही में स्वीकार किया था कि उनकी पार्टी ने वर्ष 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित केंद्रीय कानून का समर्थन करके गलती की थी।जगन ने मांग की कि केंद्रीय चुनाव आयुक्तों की चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को फिर से शामिल किया जाए।उनका तर्क है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर बढ़ी राजनीतिक तनातनी
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान नामांकन, उम्मीदवारों की सुरक्षा और चुनाव प्रशासन की भूमिका को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष आमने-सामने हैं।जहां वाईएसआरसीपी सत्तारूढ़ गठबंधन पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगा रही है, वहीं टीडीपी इन आरोपों का खंडन करते हुए विपक्ष पर हिंसा और चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने के आरोप लगा रही है।इस बीच राज्य चुनाव आयोग ने शिकायत मिलने वाले मामलों में संबंधित उम्मीदवारों से संपर्क कर नामांकन प्रक्रिया में सहायता करने की बात कही है।अब चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के सामने सभी उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित तथा निष्पक्ष चुनावी वातावरण सुनिश्चित करने की चुनौती है।