अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। टीडीपी के प्रदेश अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को वाईएसआरसीपी पर चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने और राज्य में अशांति पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी पार्टी ने स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया प्रभावित करने के उद्देश्य से विभिन्न अदालतों में करीब 60 याचिकाएं दायर की हैं। हालांकि, इन याचिकाओं की संख्या और उनके पीछे बताए गए उद्देश्य की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव रोकने के लिए कानूनी अड़चनें डालने का आरोप
तेलुगु देशम पार्टी के प्रदेश कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पल्ला श्रीनिवास राव ने कहा कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया का सामना करने के बजाय कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करके चुनाव में बाधाएं उत्पन्न कर रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल बार-बार अदालतों का रुख कर चुनाव कार्यक्रम को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है।पल्ला ने दावा किया कि वाईएसआरसीपी को जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ने का आत्मविश्वास नहीं है। इसी कारण पार्टी विभिन्न मुद्दों को लेकर न्यायालयों में याचिकाएं दाखिल कर रही है।उन्होंने वाईएसआरसीपी को 'गोड्डाली पार्टी' कहकर भी संबोधित किया। यह उनकी राजनीतिक टिप्पणी थी।
करीब 60 याचिकाएं दाखिल करने का दावा
पल्ला श्रीनिवास राव ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी ने स्थानीय निकाय चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से लगभग 60 याचिकाएं दायर की हैं।उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को कानूनी विवादों में उलझाने से लोकतांत्रिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।टीडीपी नेता ने दावा किया कि उनकी पार्टी चुनाव के लिए तैयार है और जनता के बीच जाकर समर्थन प्राप्त करना चाहती है।हालांकि, अदालत में याचिका दाखिल करना किसी भी राजनीतिक दल का कानूनी अधिकार है। केवल याचिकाएं दाखिल किए जाने से चुनाव बाधित करने की मंशा साबित नहीं होती।
नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी विवाद
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर राजनीतिक तनाव और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं।पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति सहित विभिन्न इलाकों में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की खबरें आई हैं।वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया है कि उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया और कुछ स्थानों पर उनके साथ मारपीट भी की गई।पार्टी ने दावा किया कि नामांकन पत्र फाड़े गए और उम्मीदवारों को धमकाया गया।दूसरी ओर, टीडीपी नेतृत्व इन विवादों के लिए वाईएसआरसीपी को जिम्मेदार ठहरा रहा है। दोनों दलों के आरोपों की स्वतंत्र जांच और पुष्टि आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा चुनावी विवाद
स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि उसके कई उम्मीदवारों को नामांकन पत्र जमा करने से रोका गया।बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को वाईएसआरसीपी की शिकायतों की जांच करने का निर्देश दिया।अदालत ने चुनाव आयोग से शिकायतों पर 24 घंटे के भीतर निर्णय लेने को कहा। साथ ही उम्मीदवारों की अंतिम सूची के प्रकाशन को फिलहाल स्थगित करने का निर्देश दिया।सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस महानिदेशक को भी चुनाव में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है।
निष्पक्ष चुनाव कराने की चुनौती
आंध्र प्रदेश में 28 अक्टूबर को शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मतदान प्रस्तावित है।इन चुनावों से पहले नामांकन प्रक्रिया और राजनीतिक हिंसा से जुड़े आरोपों ने राज्य की चुनावी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।वाईएसआरसीपी का कहना है कि उसके उम्मीदवारों को स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं टीडीपी का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
दोनों दलों के बीच बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर टीडीपी और वाईएसआरसीपी के बीच लगातार तीखी बयानबाजी हो रही है।पल्ला श्रीनिवास राव के ताजा बयान के बाद कानूनी याचिकाओं और चुनावी प्रक्रिया का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।राज्य निर्वाचन आयोग के सामने अब उम्मीदवारों की शिकायतों का निष्पक्ष समाधान करने और मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की चुनौती है।फिलहाल टीडीपी की ओर से लगाए गए 60 याचिकाओं और चुनाव रोकने की कथित मंशा संबंधी आरोपों को पुष्ट तथ्य नहीं माना जा सकता। चुनावी विवादों पर अदालत और निर्वाचन आयोग के आगामी फैसले महत्वपूर्ण होंगे।