विजयवाड़ा: दलित स्त्री शक्ति (डीएसएस) के राष्ट्रीय संयोजक झाँसी गेड्डम ने पीड़ितों के लिए न्याय, मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया है।
सोमवार को यहां होटल स्वर्णा पैलेस में डीएसएस द्वारा आयोजित लीगल क्लिनिक को संबोधित करते हुए, झांसी गेड्डम ने कहा कि एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम एक विशेष कानून है, जिसका उद्देश्य अत्याचार के पीड़ितों को व्यापक सुरक्षा प्रदान करना है।
हत्या, बलात्कार, प्यार के नाम पर धोखाधड़ी और POCSO से संबंधित अपराधों सहित अत्याचारों का सामना करने वाली लगभग 30 महिलाओं ने लीगल क्लिनिक में भाग लिया और न्याय तक पहुँचने में अपनी कठिनाइयों के बारे में बताया।
झाँसी गेड्डम ने कहा कि कानून के तहत दिया गया मुआवजा और पुनर्वास पीड़ितों का अधिकार है, दान नहीं। जांच, अभियोजन और मुकदमे में देरी से पीड़ितों को भारी कठिनाई हो रही थी, क्योंकि उन्हें अक्सर आरोपियों से मामले वापस लेने या समझौता करने के लिए धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ता था।
अभियोजन निदेशक बायरा कोटेश्वर राव, एससी कॉर्पोरेशन के निदेशक मरिदय्या, मनोवैज्ञानिक रमा देवी और प्रवीणा, महिला एवं बाल कल्याण विभाग की प्रतिनिधि रुकसाना, भूमिका की अनुपमा और डीबीएस के चित्ती बाबू जूरी में शामिल थे।