अमरावती: आंध्र प्रदेश के IT मंत्री नारा लोकेश ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार यह पक्का करने के लिए एक व्यापक तरीका अपना रही है कि डेटा-सेंटर का विकास पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ हो।
उन्होंने कहा कि राज्य का पहला नियम यह है कि डेटा-सेंटर में इस्तेमाल होने वाली कम से कम 70% ऊर्जा सोलर, विंड, पंप-स्टोरेज और बैटरी-बेस्ड ऊर्जा जैसे रिन्यूएबल स्रोतों से आनी चाहिए।
दिल्ली में 'पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ़ इंडिया' (PAFI) द्वारा आयोजित एक चर्चा में बोलते हुए, उन्होंने डेटा-सेंटर के विकास और उनसे पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताओं पर राज्य के नज़रिए को बताया।
पानी की ज़रूरतों पर मंत्री लोकेश ने कहा कि विशाखापत्तनम में डेटा-सेंटर क्लस्टर बनाया जा रहा है और राज्य पोलावरम लेफ्ट बैंक नहर के ज़रिए इसकी पानी की ज़रूरतों को पूरा कर रहा है।
मंत्री के ऑफ़िस से जारी एक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि पोलावरम प्रोजेक्ट उस पानी का इस्तेमाल करने में मदद करेगा जो वरना बंगाल की खाड़ी में बह जाता; इस पानी को डेटा-सेंटर की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए विशाखापत्तनम की ओर भेजा जाएगा।
मंत्री लोकेश ने यह भी कहा कि राज्य डेटा-सेंटर कंपनियों को डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) लगाने के लिए बढ़ावा दे रहा है और एक कंपनी पहले से ही ऐसी सुविधा लगा रही है।
उन्होंने ज़ोर दिया कि टिकाऊ डेटा-सेंटर विकास के लिए ऊर्जा, पानी और पर्यावरण से जुड़ी अन्य ज़रूरतों को एक साथ पूरा करना ज़रूरी है। मंत्री लोकेश ने कहा कि एक व्यापक नज़रिए की ज़रूरत है और इससे राज्यों को डेटा-सेंटर में निवेश लाने और उसे विकसित करने में सफलता मिलेगी।
लोकेश ने यह भी कहा कि राज्य अपनी अर्थव्यवस्था में निवेश, इनोवेशन और रोज़गार पैदा करने की रणनीति के तहत 23 सेक्टर-स्पेसिफिक क्लस्टर विकसित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि इन क्लस्टर में सीमेंट और ऑटोमोटिव जैसे पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग से लेकर मटीरियल साइंस, रेयर अर्थ मिनरल, बायोमेडिकल, फार्मास्यूटिकल्स, AI और डेटा-सेंटर जैसे सेक्टर शामिल हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश में Google द्वारा किए जा रहे बड़े निवेश का ज़िक्र किया और कहा कि इसके बाद डेटा-सेंटर सेक्टर में और निवेश भी आ रहे हैं।
लोकेश ने कहा कि क्वांटम टेक्नोलॉजी भी 23-क्लस्टर रणनीति का हिस्सा है और अमरावती में एक क्वांटम इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश ने IBM से पहला 150-क्यूबिट क्वांटम कंप्यूटर अमरावती लाने में पहल की है। राज्य क्वांटम टेक्नोलॉजी के आस-पास एक बड़ा इकोसिस्टम बनाने की भी योजना बना रहा है। इसमें क्रायोजेनिक्स और मटीरियल साइंस से लेकर क्वांटम एप्लीकेशन और इस्तेमाल के तरीकों (मैन्युफैक्चरिंग सहित) तक के क्षेत्र शामिल होंगे।
लोकेश ने कहा कि राज्य ब्लू और व्हाइट-कॉलर, दोनों तरह की नौकरियां पैदा करने पर ध्यान दे रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि अलग-अलग सेक्टर और स्किल लेवल पर रोज़गार के मौके पैदा किए जाएंगे। उन्होंने हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का भी ज़िक्र किया और कहा कि आंध्र प्रदेश का लक्ष्य 50,000 होटल रूम बनाना है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इन अलग-अलग सेक्टर की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए स्किलिंग बहुत ज़रूरी होगी।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश अभी 200 अरब डॉलर की इकॉनमी है और 2047 तक 2.4 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि इसे हासिल करने के लिए राज्य को "पूरी ताकत से काम करना होगा" और हर सेक्टर का विकास करना होगा।
मंत्री लोकेश ने ज़ोर दिया कि हालांकि क्वांटम टेक्नोलॉजी ज़रूरी है, लेकिन राज्य की विकास रणनीति के लिए बागवानी और एक्वाकल्चर भी उतने ही ज़रूरी हैं। उन्होंने घोषणा की कि 2 अक्टूबर को हॉर्टिकल्चर मिशन शुरू किया जाएगा, जिसमें रिसर्च के लिए लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना है।
उन्होंने यह भी कहा कि आंध्र प्रदेश, हैदराबाद में इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस की तर्ज़ पर एक इंडियन स्कूल ऑफ़ एग्रीकल्चर बनाने की योजना बना रहा है। इसका मकसद एग्रीकल्चरल रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए एक मज़बूत इकोसिस्टम बनाना है।
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