Andhra University ने हार्ट डिज़ीज़ के लिए नई अर्ली डायग्नोस्टिक किट विकसित की

Update: 2026-04-24 13:03 GMT
Assam असम: विशाखापत्तनम स्थित आंध्र यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। टीम ने कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ के प्रमुख कारण एथेरोस्क्लेरोसिस के जोखिम का शुरुआती स्तर पर पता लगाने के लिए एक नई डायग्नोस्टिक किट विकसित की है।
यह शोध चिकित्सा क्षेत्र में समय रहते बीमारी की पहचान करने और गंभीर हृदय रोगों को रोकने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। एथेरोस्क्लेरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें धमनियों की दीवारों में फैट और अन्य पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और आगे चलकर हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
इस डायग्नोस्टिक किट को आंध्र यूनिवर्सिटी के ज़ूलॉजी विभाग में कार्यरत सेंटर फॉर एडवांस्ड-एप्लाइड बायोलॉजिकल साइंसेज़ एंड एंटरप्रेन्योरशिप लैबोरेटरीज़ में विकसित किया गया है। इस परियोजना का नेतृत्व लैब के संस्थापक और प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. रविकिरन येदिदी के मार्गदर्शन में किया गया।
इस शोध में मणिकांत सोडासानी और हेमसाई यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों शोधकर्ताओं ने इस किट को डिजाइन और विकसित करने में तकनीकी और वैज्ञानिक योगदान दिया।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस किट का मुख्य उद्देश्य एथेरोस्क्लेरोसिस के जोखिम को शुरुआती चरण में ही पहचानना है, ताकि मरीजों को समय रहते उपचार दिया जा सके और गंभीर हृदय रोगों से बचाव किया जा सके।
अभी तक इस बीमारी का पता अक्सर तब चलता है जब स्थिति काफी गंभीर हो जाती है, जिससे इलाज जटिल और जोखिम भरा हो जाता है। नई किट के जरिए शुरुआती संकेतों को पहचानकर समय पर उपचार शुरू करना संभव हो सकेगा।
डॉ. रविकिरन येदिदी ने बताया कि यह तकनीक न केवल रिसर्च स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में इसे
क्लिनिकल उपयोग
के लिए भी विकसित किया जा सकता है। इससे हृदय रोगों के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
आंध्र यूनिवर्सिटी की इस उपलब्धि को मेडिकल साइंस और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह किट व्यापक स्तर पर उपयोग में लाई जाती है, तो यह हृदय रोगों की शुरुआती पहचान और रोकथाम में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
Tags:    

Similar News