विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने सोमवार को विशाखापत्तनम शहर की पुलिस को 'प्री-लिटिगेशन काउंसलिंग फोरम' (PLCF) के नाम पर सिविल विवादों में दखल देने के लिए कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों की काउंसलिंग करना उन्हें डराने-धमकाने जैसा है।

चीफ जस्टिस लिसा गिल और जस्टिस चल्ला गुना रंजन की डिवीजन बेंच ने सिविल विवादों में पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए और चेतावनी दी कि ऐसी प्रथाओं की इजाज़त देने से पुलिस 'समानांतर अदालतें' (parallel courts) चलाने लग सकती है।

हाई कोर्ट बेंच ने विशाखापत्तनम पुलिस और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे PLCF के तहत सिविल विवादों के संबंध में किसी को नोटिस जारी न करें या समन न भेजें।

 कोर्ट ने एक विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी जिसमें यह बताया जाए कि किस कानून के तहत लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे थे, किन नियमों के तहत ऐसी कार्रवाई की जा रही थी और किन गाइडलाइंस के तहत PLCF का गठन किया गया था। मामले की अगली सुनवाई के लिए इसे स्थगित कर दिया गया।

यह मामला फिल्म प्रोड्यूसर नट्टी कुमार और बिजनेसमैन मंचुकोंडा रामकृष्ण द्वारा दायर याचिकाओं के ज़रिए हाई कोर्ट के सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि विशाखापत्तनम पुलिस सिविल विवादों में दखल दे रही थी और PLCF के नाम पर उन्हें बार-बार पुलिस स्टेशन बुला रही थी।

 

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